मोती की आंखें और सोने का कवर… रहस्‍यमय एज्टेक सभ्यता के अग्नि देवता का सैकड़ों साल पुराना मुखौटा देख एक्सपर्ट हैरान

Pearl eyes and gold cover... Experts are surprised to see the hundreds of years old mask of the fire god of the mysterious Aztec civilization

  • एज्टेक सभ्यता का फिरोजा जड़ा लकड़ी का मुखौटा
  • एक्सपर्ट का दावा, ये मास्क मेसोमेरिका में कहीं से है
  • अनुमान है इसे 1400 से 1521 के बीच बनाया गया था

लंदन/एजेंसी। ब्रिटिश म्यूजियम में एक फिरोजा जड़ा लकड़ी का एक शाजदार मास्क (मुखौटा) नुमाइश के लिए रखा गया है। यह मुखौटा 1400 और 1521 के बीच मेसोमेरिका की एज्टेक सभ्यता से संबंधित है। इस मुखौटे के लिए माना जाता है कि यह एज्टेक अग्नि देवता जिउहतेकुहटली का है। इस मुखौटे को 16वीं शताब्दी की शुरुआत में स्पेनिश विजेता हर्नान कोर्टेस एज्टेक साम्राज्य से खजाने के तौर पर ले गए थे। मुखौटा एज्टेक सभ्यता के धार्मिक अनुष्ठानों, खासतौर से आग से जुड़ी मान्यताओं पर प्रकाश डालता है। ।लाइव साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मुखौटा स्पेनिश देवदार से बना है और इसे फिरोजा के टुकड़ों से सजाया गया है। इसकी आंखें मोती की हैं, जिनके चारों ओर सोने की पट्टी है और दांत शंख के बने हैं। मुखौटे के अंदर सिनाबार लगा हुआ है, जो एक ऐसा खनिज है जिसमें पारा होता है। यह मुखौटा तकरीबन 6.6 इंच (16.8 सेंटीमीटर) लंबा है। इसके कनपटियों पर छोटे-छोटे छेद हैं, जिससे पता चलता है कि इसे कभी पहना जाता था या फिर किसी चीज से चिपकाया जाता था।
इस मुखौटे को जिउहतेकुहटली देवता का माना जाता है। जिउहतेकुहटली का नाहुतल भाषा में अर्थ फिरोजा स्वामी से है। वह एज्टेक में नई अग्नि के देवता थे। एज्टेक लोग टेनोच्टिट्लान के अग्नि मंदिर में लगातार ‘पवित्र अग्नि’ जलाते थे। 52 साल में एक बार एज्टेक पुजारी आग को बुझने देते थे। इसके बाद फिर जिउहतेकुहटली का प्रतिनिधित्व करने वाला फिरोजा मुखौटा पहने हुए महायाजक जिउहतलपिल्ली (नई अग्नि समारोह) करते थे। इसमें बलिदान किए गए एक व्यक्ति की छाती पर आग जलाई जाती थी, जब आग तेज हो जाती थी तो उसका दिल निकालकर आग में डाल दिया जाता था। इसे एक्जेट सभ्यता को आने वाले पचास साल के लिए सुरक्षित करने वाला अनुष्ठान माना जाता था।
यह मुखौटा ब्रिटिश म्यूजियम में प्रदर्शित कई फिरोजा वस्तुओं में से एक है, जिसे स्पेनिश विजेता हर्नान कोर्टेस ने 16वीं शताब्दी की शुरुआत में एज्टेक साम्राज्य से खजाने के रूप में लिया था। ब्रिटिश म्यूजियम के अनुसार, यह मुखौटा एज्टेक सभ्यता की कला और शिल्प कौशल का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। साथ ही यह एज़्टेक सभ्यता के विश्वासों और अनुष्ठानों के बारे में भी मूल्यवान जानकारी देता है। म्यूजिम का कहना है कि यह इतिहास का एक टुकड़ा है, जो हमें अतीत से जोड़ता है और खोई हुई सभ्यता की जटिलताओं को समझने में हमारी बहुत मदद करता है।

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