एनआईए चीफ सदानंद दाते की महाराष्ट्र कैडर में वापसी, बनाए जा सकते हैं राज्य के डीजीपी

मां ने घरों में किया काम, सदानंद ने बांटे अखबार

कांती जाधव/महाराष्ट्र ब्यूरो। मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने सोमवार को गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के महानिदेशक सदानंद वसंत दाते की समय से पहले स्वदेश वापसी के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए एक नोटिस जारी किया। नोटिस के अनुसार, 1990 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी सदानंद वसंत दाते को तत्काल प्रभाव से उनके मूल कैडर, महाराष्ट्र में बहाल किया जाएगा। सदानंद दाते ने 31 मार्च, 2024 को सेवानिवृत्त हुए तत्कालीन महानिदेशक दिनकर गुप्ता से भारत की विशिष्ट आतंकवाद जांच इकाई, एनआईए के महानिदेशक का पदभार ग्रहण किया था।
सदानंद दाते को मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकवादी हमले के नायक के रूप में जाना जाता है। महाराष्ट्र की मौजूदा पुलिस महानिदेशक रश्मि शुक्ला का कार्यकाल 31 दिसंबर को समाप्त होगा जिसके मद्देनजर दाते अगले पुलिस महानिदेशक पद के प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। आदेश में कहा गया है कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने गृह मंत्रालय के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है जिसमें एनआईए के महानिदेशक सदानंद वसंत दाते (महाराष्ट्र काडर के 1990 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी) को तत्काल प्रभाव से उनके मूल काडर में समयपूर्व भेजा जा रहा है।
एनआईए में शामिल होने से पहले, सदानंद दाते महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) के प्रमुख के रूप में कार्यरत थे और उन्होंने राज्य में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया, जिनमें मीरा भायंदर वसई विरार के पुलिस आयुक्त, कानून और व्यवस्था के संयुक्त आयुक्त और मुंबई में अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त शामिल हैं। उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में उप महानिरीक्षक और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में महानिरीक्षक के रूप में दो कार्यकाल भी पूरे किए हैं। नवंबर 2008 में मुंबई पर हुए भयावह हमलों को अंजाम देने वाले आतंकवादियों से निपटने में उनकी भूमिका के लिए दाते को 2008 में राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक से सम्मानित किया गया था। उन्हें 2007 में राष्ट्रपति पुलिस मेधावी सेवा पदक और 2014 में राष्ट्रपति पुलिस विशिष्ट सेवा पदक से भी सम्मानित किया गया है।
सदानंद दाते का जन्म महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, फिर भी उनके पिता सदानंद को पढ़ाने में कोई कमी नहीं रखना चाहते थे। मेहनत मजदूरी करके पर परिवार चलाते और सदानंद दाते को स्कूल भेजते। लेकिन सदानंद दाते जब 15 साल के थे तब उनके पिता वसंत का अचानक निधन हो गया। परिवार पर गाज गिर पड़ी।
सदानंद की मां ने घर चलाने के लिए घरों में काम करना शुरू किया। वह सुबह से देर रात तक घरों में झाड़ू-पोछा करतीं, जूठे बर्तन साफ करतीं लेकिन परिवार के खर्च पूरे नहीं हो पा रहे थे। सदानंद ने मां का हाथ बंटाने के लिए सुबह 4 बजे उठकर अखबार बांटने का काम शुरू किया। ठंड हो या गर्मी, बारिश हो या वह बीमार हों सुबह उठकर वह घरों में अखबार डालते। उसके बाद स्कूल पढ़ने जाते। तमाम संघर्ष थे लेकिन सदानंद ने कभी भी पढ़ाई नहीं छोड़ी। जब भी समय मिलता, सदानंद दाते पढ़ने बैठ जाते।
सदानंद दाते ने स्थानीय सरकारी स्कूल से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की। उसके बाद पुणे यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में पोस्ट ग्रैजुएशन किया। उसके बाद यूनिवर्सिटी से ही डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। सदानंद ने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार उन्होंने 1990 में आईपीएस बनने का सपना पूरा किया। इस दौरान उन्होंने हम्फ्री फेलोशिप प्रोग्राम के तहत मिनेसोटा विश्वविद्यालय में अध्ययन किया। उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका में वॉइट कॉलर और संगठित अपराध को नियंत्रित करने के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलुओं का अध्ययन किया। भारत लौटने पर उन्हें अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (आर्थिक अपराध शाखा) के पद पर तैनात किया गया।
मुंबई हमले के दौरान सदानंद दाते सेंट्रल रीजन के एसीपी थे। मुंबई हमले के दौरान वह अपने साथियों के साथ फ्रंटलाइन पर उतरे। आतंकवादियों का डटकर सामना किया। वह सीधे उस कामा अस्पताल की बिल्डिंग में घुस गए, जहां से आतंकी उनकी पुलिस टीम पर गोलियां बरसा रहे थे। इसी दौरान वह ग्रेनेड की चपेट में आ गए। यह ग्रेनेड उनसे तीन फुट की दूरी पर फटा था। इस हमले में सब इंस्पेक्टर प्रकाश मोरे की मौत हो गई। सदानंद दाते घायल हो गए लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वह आतंकियों से बराबर भिड़े रहे। वह अपनी टीम के साथ घायल अवस्था में ही अस्पताल की छठवीं मंजिल तक पहुंच गए। उन्होंने अपनी टीम के साथ सीढ़ियों के पास छिपकर आतंकियों की फायरिंग का जवाब देना शुरू कर दिया। लगभग 40 मिनट तक फायरिंग होती रही। आतंकियों ने सदानंद दाते की तरफ ग्रेनेड फेंका। ग्रेनेट फटा और सदानंद बुरी तरह घायल हो गए। इसी दौरान अजमल कसाब और इस्माइल मौके का फायदा उठाकर वहां से भाग निकले। हालांकि सदानंद दाते और उनकी टीम ने अस्पताल को बड़े हमले से बचा लिया।

मुंबई आतंकी हमले के नायक

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