एनकाउंटर का खौफ से हथियार छोड़ नक्सलियों का सरेंडर

24 जवानों की शहादत के थे जिम्मेदार, पुलिस के हथियार भी लूटे

दंतेवाड़ा/छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। रविवार को 65 लाख रुपए के कुल 27 इनामी सहित 37 हार्डकोर नक्सलियों ने हथियार डालकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। सभी ने डीआरजी कार्यालय दंतेवाड़ा में अधिकारियों के सामने औपचारिक आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पित कैडरों में चार 8 लाख, एक 5 लाख, और कई 2 लाख व 1 लाख के इनामी शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि इनमें कंपनी नंबर-6, कंपनी नंबर-10, प्लाटून-16, आमदई एरिया कमेटी और इंद्रावती एरिया कमेटी जैसे कोर नक्सली ढांचे के सक्रिय सदस्य हैं। कुछ महिलाएं भी हैं, जो एसजीसीएम कमलेश की बॉडीगार्ड और डीवीसीएम निर्मला की गार्ड रह चुकी हैं।
इन आतंकियों पर 2019-2024 के बीच कई बड़ी वारदातें दर्ज हैं। इनमें 2020 में मिनपा में टीसीओसी टीम पर हमला जिसमें 26 जवान शहीद और 20 घायल हुए थे। जवानों के हथियार लूट, 2024 में गोबेल-थुलथुली जंगल में पुलिस पार्टी पर फायरिंग और सड़कें खोदना, पेड़ गिराना, बंद सप्ताह में बैनर-पोस्टर लगाना शामिल हैं। आत्मसमर्पण समारोह में डीआईजी दंतेवाड़ा रेंज कमलोचन कश्यप, डीआईजी सीआरपीएफ राकेश चौधरी, एसपी दंतेवाड़ा गौरव राय, कमांडेंट 111, 230 व 80वीं वाहिनी सीआरपीएफ सहित तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
आईजी बस्तर सुंदरराज पी ने बताया कि पूना मारगेम (पुनर्वास से पुनर्जीवन) अब बस्तर में स्थायी शांति की सबसे मजबूत पहल बन चुकी है। सिर्फ 20 महीनों में दंतेवाड़ा में 165 इनामी सहित 508 से ज्यादा नक्सलियों ने हथियार डाले हैं। पूरे बस्तर रेंज में लोन वर्राटू अभियान के तहत 333 इनामी सहित 1,160 नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं।
आत्मसमर्पित सभी नक्सलियों को तत्काल 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई। छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत इन्हें कौशल प्रशिक्षण, कृषि भूमि, मकान और अन्य सुविधाएं मिलेंगी। पुलिस और प्रशासन ने एक बार फिर अपील करते हुए कहा कि हिंसा का रास्ता छोड़िए, शांति और सम्मान की राह अपनाइए। पूना मारगेम हर उस साथी के लिए खुला है, जो घर लौटना चाहता है।

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