यूट्यूबर एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट से राहत, सांप के जहर केस में एफआईआर रद करने का आदेश

नई दिल्ली/एजेंसी। यूट्यूबर एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली गई है। सुप्रीम कोर्ट ने रेव पार्टी में सांप के जहर के कथित इस्तेमाल मामले में एल्विश यादव के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चल रही आपराधिक कार्यवाही रद कर दी है। हालांकि कोर्ट ने सक्षम अथारिटी को वन्यजीव कानून कानून के मुताबिक नयी शिकायत दर्ज कर उचित कार्यवाही करने की छूट दी है।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंद्रेश और एन कोटीश्वर सिंह की पीठ ने दिए आदेश में कहा कि यह मामला कानून की ²ष्टि से मान्य नहीं है। कोर्ट ने मुख्यत: दो मुद्दों एनडीपीएस कानून की धारा 2 (23) और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 55 के तहत कार्यवाही की वैधता पर विचार किया।
सुप्रीम कोर्ट ने एल्विश यादव के खिलाफ एफआईआर रद की
एनडीपीएस कानून के संदर्भ में कोर्ट ने पाया कि जिस पदार्थ (सांप के जहर से जुड़ा एंटीडोट) का जिक्र किया गया है वह कानून की सूची में शामिल नहीं है। कोर्ट ने ये भी पाया कि एल्विश यादव के पास से कोई बरामदगी भी नहीं हुई है इन आधारों पर कोर्ट ने माना कि इस मामले में एनडीपीएस एक्ट का इस्तेमाल उचित नहीं है। वन्यजीव संरक्षण कानून के संदर्भ में कोर्ट ने कहा कि धारा 55 के अनुसार मुकदमा केवल अधिकृत अधिकारी द्वारा दायर शिकायत के आधार पर ही शुरू किया जा सकता है। इस मामले में शिकायत एक निजी व्यक्ति द्वारा की गई थी जो कानून के अनुरूप नहीं है। कोर्ट ने ये भी कहा कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत लगाए गए आरोप भी स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं होते। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हम किसी को क्लीनचिट नहीं दे रहे। यदि कोई अपराध हुआ है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा कि एल्विश यादव के खिलाफ एफआईआर में आपीसी के तहत दर्ज अपराध,गुरुग्राम में पहले दर्ज की गई एफआईआर पर आधारित हैं, जिसमें क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है।
वन्यजीव अधिनियम के तहत कार्यवाही अमान्य पाई गई
कोर्ट ने गौर किया कि एल्विश से कोई बरामदगी नहीं हुई है, आरोपपत्र में केवल यह आरोप लगाया गया है कि उसने अपने दोस्तों के जरिए मनोरंजन के उद्देश्य से सांप के जहर का आर्डर दिया था, जो इस मामले में सह आरोपी है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में एनडीपीएस कानून के प्रविधान लागू नहीं किये जा सकते क्योंकि सह-आरोपियों से बरामद तरल पदार्थ अनुसूची के तहत निर्धारित पदार्थ नहीं था। इस मामले में एल्विश यादव ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने एल्विश की याचिका खारिज कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल छह अगस्त को एल्विश यादव के खिलाफ निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। एल्विश यादव के खिलाफ यह मामला 22 नवंबर 2023 को दर्ज हुआ था।

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