कोर्ट में चल रहे मामलों में वकीलों से सीधे संपर्क नहीं कर सकेंगे वकील

यूपी सरकार जारी करेगी गाइडलाइन

प्रयागराज/उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट को सूचित किया कि वह जल्द ही एक राज्यव्यापी दिशा-निर्देश (गाइडलाइंस) तैयार करेगी। इसके तहत पुलिस कर्मियों को ऐसे मामलों में जो कोर्ट में लंबित (सब-जूडिस) हैं उनमें वकीलों से सीधे संपर्क करने या बिना कोर्ट की अनुमति के संबंधित स्थानों पर जाने से रोका जाएगा। मतलब, प्रदेश में कोर्ट में चल रहे मामलों में पुलिस के हस्तक्षेप को कम करने की नीति तैयार की जा रही है। सरकार ने इसके लिए 10 दिनों को समय मांगा। हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 जुलाई की तिथि निर्धारित की है।
दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका की सुनवाई चल रही थी। इसी दौरान सरकार की ओर से यह बयान आया है। जनहित याचिका के तहत जौनपुर के एक गांव में ग्राम सभा की जमीन पर अतिक्रमण का आरोप लगाया गया था। इस याचिका को 90 वर्षीय याचिकाकर्ता ने दायर किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस अधिकारी उन्हें याचिका वापस लेने के लिए धमका रहे हैं।
कोर्ट में इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके घर पर छापा मारा। इस गंभीर आरोप को देखते हुए कोर्ट ने 11 जुलाई को सख्त टिप्पणी की थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि वकीलों के पेशेवर कार्यों को लेकर उन्हें डराना या जांच के घेरे में लाना स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
15 जुलाई को हुई अगली सुनवाई में जस्टिस जेजे मुनीर की पीठ ने एसपी जौनपुर के व्यक्तिगत हलफनामे को रिकॉर्ड पर लिया। इसमें बताया गया कि मामले में दो पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जबकि अन्य शामिल अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
12 जुलाई को एसपी जौनपुर ने एक जिला स्तरीय आदेश जारी किया है, जिसमें सभी पुलिस थानों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इसमें कहा गया कि ऐसे स्थानों पर न जाएं जो न्यायिक विवाद के अधीन हैं और इन ममलों में जब तक कोर्ट से अनुमति न ली गई हो। एसपी ने आदेश में कहा है कि पुलिस किसी भी पक्ष के अधिवक्ता से सीधे संपर्क न करें, जब मामला कोर्ट में विचाराधीन हो।
सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार को ऐसी ही गाइडलाइंस पूरे प्रदेश में लागू करने के लिए 10 दिन का समय चाहिए। कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार और एसपी जौनपुर को अगली सुनवाई तक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया। अब यह मामला 28 जुलाई को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
हाईकोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि पुलिस या जांच एजेंसियों की ओर से वकीलों को उनके क्लाइंट से संबंधित जानकारी के लिए तलब करना उचित नहीं है। यह कानूनी पेशे की स्वायत्तता के लिए खतरा है।

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