जाम से जूझती हिमाचल की वादियां, मंडी से मनाली तक हर रोज ट्रैफिक का कहर, टूट पड़ा पर्यटकों का सैलाब
Himachal's valleys are struggling with traffic jams, traffic havoc from Mandi to Manali every day, a flood of tourists has broken in

मनाली/हिमाचल प्रदेश। गर्मियों की छुट्टियों में जहां एक ओर हिमाचल प्रदेश की वादियों की ओर पर्यटकों का सैलाब उमड़ पड़ा है, वहीं दूसरी ओर यह भारी भीड़ अब सिरदर्द बनती जा रही है। मंडी से लेकर मनाली और बंजार तथा पार्वती घाटियों तक के रास्तों पर भीषण ट्रैफिक जाम ने जनजीवन और पर्यटन दोनों को अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, इस सीजन में प्रतिदिन 15,000 से अधिक पर्यटक मनाली पहुंच रहे हैं। हालांकि, इस भारी भीड़ के आगे इलाके की तंग सड़कों और कमज़ोर इंफ्रास्ट्रक्चर की पोल खुल गई है। मंडी-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग, सोलंग वैली होते हुए अटल टनल की ओर जाने वाला रास्ता और कसोल-मनिकरण मार्ग लगातार कई दिनों से जाम से जूझ रहे हैं।
मनाली शहर के भीतर भी हालात चिंताजनक हैं। ट्रैफिक प्रबंधन की कमी और पार्किंग स्थलों की भारी किल्लत ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। ओल्ड मनाली, हिडिम्बा देवी मंदिर और वशिष्ठ जैसे लोकप्रिय स्थानों की ओर जाने वाले रास्ते घंटों तक जाम में फंसे रहते हैं। स्थानीय स्तर पर कुछ उद्यमियों ने निजी पार्किंग की व्यवस्था की है, लेकिन वह भी नाकाफी साबित हो रही है। स्थानीय ट्रैवल ऑपरेटर भुवनेश ठाकुर का कहना है, “इस बार की भीड़ पिछले साल से भी ज्यादा हो सकती है, कश्मीर की स्थिति का असर यहां दिख रहा है। ढांचा इतना दबाव नहीं झेल सकता।
बंजार क्षेत्र में नेशनल हाईवे-305 पर हालात और भी बदतर हैं। ओट से जलोरी जोत तक की संकरी सिंगल-लेन सड़क पर टूरिस्ट बसें रोज़ भारी जाम का कारण बन रही हैं। पर्यावरणविद् गुमान सिंह कहते हैं कि यह सड़क दो कारों के लिए भी मुश्किल से काफी है, लेकिन प्रशासन यहां भी बसों को अनुमति दे रहा है। स्थानीय लोग बार-बार विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं, जिनमें 1 अप्रैल को हुआ प्रदर्शन भी शामिल है। उनकी मांग है कि सड़क का चौड़ीकरण और उचित रखरखाव जल्द से जल्द किया जाए। होटल मालिकों का भी कहना है कि जाम की यह समस्या अब पर्यटन उद्योग को नुकसान पहुंचा रही है। होटल व्यवसायी ललित कुमार कहते हैं कि कोई भी चार घंटे जाम में फंसे रहकर छुट्टियां नहीं बिताना चाहता। अगर सरकार ने कदम नहीं उठाए, तो पर्यटक आने ही बंद कर देंगे।”
पार्वती घाटी का भुंतर-मनिकरण मार्ग भी इसी तरह की दिक्कतों से जूझ रहा है। यह रास्ता इतना संकरा है कि बड़े वाहन एक-दूसरे को पार नहीं कर सकते। प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। टूरिस्ट सीजन अपने चरम पर है और न राहत के संकेत हैं, न ही कोई योजना। ऐसे में स्थानीय लोग और पर्यटक दोनों ही लंबी ट्रैफिक लाइनों और चिड़चिड़े सफर के लिए मजबूर हैं। इस बार की गर्मियां, पहाड़ों की ठंडी हवाओं के बीच, धैर्य की असली परीक्षा बन चुकी हैं।




