दिल्ली ट्रैफिक पुलिस में जिससे करवाते थे उगाही, उसी ने ट्रैफिकवालों को पकड़वाया, जानिए पूरा मामला
The person from whom extortion was done in Delhi Traffic Police, he himself got the traffic police arrested, know the whole matter

नई दिल्ली/एजेंसी। दिल्ली ट्रैफिक पुलिसके समयपुर बादली सर्कल में तैनात एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (एएसआई) और हेड कॉन्स्टेबल को हाल ही में दिल्ली पुलिस की विजिलेंस यूनिट ने 30 हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था। पुलिस सूत्र ने बताया, इस मामले में खास बात यह है कि पुलिसवालों की गिरफ्तारी उस शख्स के बयान पर हुई है, जो वर्षों से इन्हीं पुलिसवालों के लिए उगाही कर रहा था। यानी पुलिसवाले उसी को तमाम जगहों पर रिश्वत लेने भेजते थे। वह हर महीने उनके लिए 75 हजार रुपये जमा करके लाता था।
विजिलेंस यूनिट में तैनात पुलिस सूत्र ने बताया, 40 वर्षीय शख्स ने बीती 21 मई को विजिलेंस यूनिट में शिकायत दी थी, जिसमें उसने बताया था कि वह ट्रैफिक यूनिट में चल रहे भ्रष्टाचार को उजागर करने आया है। उसने दावा किया कि वह करीब चार साल पहले बवाना ट्रैफिक सर्कल के साथ काम करने वाली प्राइवेट क्रेन पर हेल्पर का काम करते थे। उसी दौरान बवाना सर्कल समयपुर बादली सर्कल बन गया। इस दौरान वह ट्रैफिक पुलिसवालों की कई कामों में मदद करने लगा।
करीब दो साल पहले दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने प्राइवेट क्रेन को हटा दिया मगर हेल्पर को अपने पास काम में मदद करने के लिए रख लिया। वह उनके खाने-पीने का ध्यान रखता और वर्दी प्रेस करवाकर लाने लगा। आरोप था कि कुछ ही समय में वहां तैनात ट्रैफिक पुलिसवालों ने उन्हें कई ट्रांसपोर्टर और अन्य लोगों के पास भेजना शुरू कर दिया।
वह उन्हें कहते थे कि वहां से हमारे रुपये ले आओ। वह अलग-अलग जगह जाकर उनके लिए रुपये ले आते थे। इस तरह वह हर महीने उनके लिए 70 से 75 हजार रुपये जमा करते थे। कुछ समय बाद पुलिसवालों ने उन्हें कहा कि पेटीएम पर ही पेमेंट ले लिया करो और हमें कैश दे दिया करो या हमारे बताए अकाउंट में डाल दिया करो। अब वह ऐसा ही करने लगे।
शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्हें कुछ दिन पहले ही इस बात का पता चला कि पुलिसवाले उनसे जो रुपये मंगवाते हैं, वो रिश्वत के रुपये होते हैं। इसके बदले वे ट्रांसपोर्टर, गाड़ी मालिकों व अन्य लोगों के चालान नहीं काटते हैं। अगर काटते भी हैं तो कम जुर्माने के चालान काटते हैं। यह जानने के बाद से वह परेशान रहने लगा क्योंकि ट्रैफिक पुलिसवालों ने उनकी गरीबी, बेरोजगारी और कम पढ़े लिखे होने का फायदा उठाकर उन्हें इस जंजाल में फंसा दिया था।
अब शिकायकर्ता ने ट्रैफिक पुलिसवालों से कह दिया था कि वह अब उनके लिए काम नहीं करेगा, जिस पर वे उन्हें धमकी देने लगे कि अगर तू हमारे लिए काम नहीं करेगा तो हम तुझे गाड़ी में डालकर ले जाएंगे और किसी भी केस में बंद कर देंगे। इस कारण वह अपनी शिकायत लेकर विजिलेंस यूनिट के पास पहुंचे। उनके पास वो 30 हजार रुपये भी थे, जो उन्होंने ट्रैफिक पुलिसवालों के लिए जमा किए थे। इसके बाद पुलिस टीम ने शिकायतकर्ता को रिश्वत का पैसा लेकर दोनों पुलिसवालों के पास भेज दिया। आरोपी पीड़ित को अपनी गाड़ी में बैठाकर ले गए और उससे रिश्वत के रुपये मांग लिए। बस फिर क्या था तभी विजिलेंस टीम ने उन्हें रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।




