बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ती हिंसा के विरोध में एबीवीपी ने जेएनयू में किया प्रदर्शन

फूंका इस्लामिक कट्टरता का पुतला

नई दिल्ली। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के विरुद्ध बढ़ती हिंसा और अत्याचार की घटनाओं के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की जेएनयू इकाई ने शनिवार को प्रदर्शन किया। जेएनयू परिसर में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन के दौरान एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने उग्र इस्लामिक कट्टरता के प्रतीकात्मक पुतले का दहन कर आक्रोश जताया। एबीवीपी ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में कट्टरपंथी तत्वों द्वारा लगातार हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। हाल ही में मयमनसिंह जिले के भालुका उपजिला में दीपु चंद्र दास नामक युवक की नृशंस हत्या की घटना ने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। बताया गया कि दीपु एक गारमेंट फैक्ट्री में कार्यरत था और किराए के मकान में रहता था। आरोप है कि पैगंबर मुहम्मद के अपमान के झूठे आरोप में भीड़ ने उसके घर में घुसकर पहले बेरहमी से पिटाई की और फिर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को पेड़ से बांधकर आग के हवाले कर दिया गया।
इस घटना के विरोध में आयोजित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। एबीवीपी ने आरोप लगाया कि जेएनयू के वामपंथी संगठन इस तरह की घटनाओं पर चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर लगातार प्रदर्शन करते रहते हैं।
एबीवीपी जेएनयू इकाई अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार मानवता के विरुद्ध अपराध हैं और इस पर मौन रहना भी अपराध के समान है। वहीं, इकाई मंत्री प्रवीण के. पीयूष ने कहा कि पुतला दहन धार्मिक कट्टरता और हिंसा को बढ़ावा देने वाली विचारधाराओं के विरुद्ध चेतावनी है। उन्होंने कहा कि एबीवीपी पीड़ितों की आवाज़ उठाती रहेगी।

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