वरिष्ठ पत्रकार एवं राष्ट्रीय सहारा समाचार पत्र के समूह संपादक डॉ. विजय राय का निधन

भारत एक्सप्रेस के चेयरमैन उपेन्द्र राय ने शामिल होकर दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली/एजेंसी। देश के वरिष्ठ पत्रकार एवं राष्ट्रीय सहारा समाचार पत्र के समूह संपादक डॉ. विजय राय नहीं रहे। आज उनका हार्ट अटैक की वजह से निधन हो गया। वे कैंसर से पीड़ित थे। वे मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में भर्ती रहे थे। डॉ. विजय राय के देहावसान की सूचना मिलते ही पत्रकारिता जगत में शोक की लहर दौड़ गई। रविवार दोपहर नोएडा में उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके अंतिम संस्कार में सहारा समूह और भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क के अधिकतर सदस्य पहुंचे.भारत एक्सप्रेस के सीएमडी एवं एटिडर-इन-चीफ उपेन्द्र राय उनकी अंत्येष्टि में शामिल हुए। सीएमडी उपेन्द्र राय ने डॉ. विजय राय को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिजनों के साथ शोक-संवेदनाएं व्य​क्त कीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर डॉ. विजय राय के साथ अपनी यादें साझा कीं। अंत्येष्टि के दौरान उनकी अर्थी को कंधा दिया।
सहारा ग्रुप के अखबार राष्ट्रीय सहारा के समूह संपादक विजय राय का अचानक यूं चले जाना, उनसे जुड़े सभी पत्रकारों और मीडियाकर्मियों को आज रुला गया। देश के वरिष्ठतम पत्रकारों में शुमार विजय राय राष्ट्रीय सहारा अख़बार में फिलहाल ऐसे इकलौते पत्रकार थे, जिन्होंने स्ट्रिंगर (ट्रेनी रिपोर्टर) से लेकर इस राष्ट्रीय अखबार के समूह संपादक तक का सफर तय किया। विजय राय इकलौते ऐसे समूह संपादक थे, जो मीडियाकर्मियों की सैलरी में देरी होने पर प्रबंधन से भिड़ जाते थे।
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में जन्मे विजय राय की पढ़ाई गोरखपुर विश्वविद्यालय और बीएचयू, वाराणसी में हुई थी। वह दिल्ली में राष्ट्रीय सहारा में एक रिपोर्टर के रूप में जुड़े और सैकड़ों लोगों को पत्रकार बनाकर नौकरी दिलाई। लगभग आधा दर्जन लोगों को संपादक बनाया। रिपोर्टर से शुरुआत कर दिल्ली ब्यूरो के पहले स्टेट ब्यूरो चीफ, फिर नेशनल ब्यूरो चीफ, स्थानीय संपादक, समूह संपादक और सहारा ग्रुप के सेकंड मीडिया हेड बने।
नेशनल ब्यूरो में रहते हुए उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा की रिपोर्टिंग के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों के साथ कई बार विदेश यात्राएं कर राष्ट्रीय सहारा को जीवंत बनाए रखा। अपनी मजाकिया शैली के कारण वह हमेशा चर्चित रहते। नोएडा कैंपस में कई बार मीडियाकर्मी उन्हें ‘बॉस’ कहने की औपचारिकता भूल जाते थे। जब भी मीडियाकर्मियों की कोई समस्या होती, तो सबसे पहले विजय राय को ही याद किया जाता। उनकी बातों में कुछ ऐसा जादू था कि लोग उन्हें तुरंत मान लेते थे।

बड़े भाई विजय राय का आख़िरी चरण स्पर्श करते छोटे भाई एडवोकेट प्रदीप राय!

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