महाकुंभ की फर्जी वेबसाइट बनाकर ठगी, पुलिस ने चार आरोपियों को किया गिरफ्तार
Fraud committed by creating fake website of Maha Kumbh, police arrested four accused

- फर्जी वेबसाइट बनाकर टेंट और होटल की बुकिंग करते थे
- प्रयागराज के एक होटल प्रबंधक ने पुलिस को दी थी शिकायत
- वाराणसी, आजमगढ़ और बिहार के आरोपी गिरफ्तार हुए
प्रयागराज/उत्तर प्रदेश। महाकुंभ मेला की फर्जी वेबसाइट बनाकर कॉटेज, टेंट और होटल की बुकिंग करने वाले चार शातिरों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी वाराणसी की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में वेबसाइट बनाने का काम करते हैं। इनके पास से पुलिस ने तीन लैपटॉप, दो मोबाइल और छह एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस इनकी काफी दिनों से तलाश कर रही थी। प्रयागराज शहर के बड़े होटलों की फोटो लगाकर ये बुकिंग कर लोगों से मोटी रकम वसूल रहे थे।बता दें कि महाकुंभ में शहर के एक नामी होटल में बुकिंग के नाम पर आए दिन पर्यटकों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा है। होटल कान्हा श्याम के नाम से चल रही फर्जी वेबसाइट को लेकर साइबर पुलिस को पता चला। पुलिस की जांच में पाया गया कि यह साइट हरियाणा से ऑपरेट की जा रही है। 16 दिसंबर को होटल कान्हा श्याम के महाप्रबंधक रूपेश कुमार सिंह ने उनके होटल के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाकर बुकिंग करने पर सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज करवाई थी। मामले की जांच साइबर पुलिस कर रही है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने डोमेन कंपनी को मेल के माध्यम से पूछा था कि उक्त वेबसाइट किस शहर से संचालित हो रही है। साथ ही होस्ट करने वाले के बारे में भी जानकारी मांगी गई थी।
डीसीपी सिटी अभिषेक भारती ने बताया कि गिरफ्तार लोगों की पहचान बिहार के नालंदा निवासी पंकज, वाराणसी के चौबेपुर निवासी यश चौबे, वाराणसी के चौबेपुर निवासी अंकित गुप्ता और आजमगढ़ के लसड़ा खुर्द निवासी अमन के रूप में हुई है। गिरफ्तार लोगों के पास से तीन लैपटॉप, छह फोन और छह एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने कॉटेज, टेंट, होटल की बुकिंग के लिए महाकुंभ से मिलते-जुलते नामों से विभिन्न फर्जी वेबसाइट बनाईं और उनके माध्यम से वे ठहरने की उत्तम व्यवस्था, वीआईपी स्नान और दर्शन आदि विभिन्न प्रकार के आकर्षक प्रलोभन देकर तीर्थयात्रियों से साइबर ठगी कर रहे थे। साइबर पुलिस का दावा है कि फर्जी वेबसाइट से चल रहे ठगी के खेल को बंद कर दिया गया है। अब तक लगभग 54 वेबसाइट बंद की गई हैं।




