सड़क हादसे में टूट गया था दुर्लभ कछुए का खोल, बरेली के वैज्ञानिक जोड़ने में जुटे

बरेली/उत्तर प्रदेश। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक एक भारतीय फ्लैपशेल कछुआ बचाने के मिशन पर हैं। इसका खोल एक दुर्घटना के बाद टूट गया था। इस कछुए को 8 जुलाई को यहां लाया गया था। आईवीआरआई बरेली में पशु और वन्यजीव केंद्र प्रमुख वैज्ञानिक और प्रभारी डॉ. अभिजीत पावड़े ने कहा कि एक सामाजिक कार्यकर्ता बदायूं से इस कछुए को लेकर संस्‍थान में आया था। भारतीय फ्लैपशेल कछुए संकटग्रस्‍त वन्यजीव की रेड बुक में सूचीबद्ध हैं। डॉ. पावड़े ने कहा, कछुए का निरीक्षण करने के बाद, हमने पाया कि कोई वाहन उस पर चढ़ गया था। इसी वजह से उसका खोल टूट गया था। इस स्थिति में कछुए को बचाना बहुत मुश्किल था, क्योंकि यही खोल उसे नमी देता है और गर्मी को नियंत्रित करता है। आवरण (खोल) को जोड़ना जरूरी था।
उन्होंने कहा कि कछुए का आवरण बहुत सख्त है और टूटे हुए हिस्से को केवल सिलाई करके ही जोड़ा जा सकता है। डॉ. पावड़े ने कहा, कछुए की हालत बहुत नाजुक होने से खोल को ऑर्थो ड्रिल करके सिलाई करना मुश्किल था। हम इसकी खराब हालत के कारण इसे बेहोश करने वाली दवा भी नहीं दे पा रहे थे। ऐसी स्थिति में कछुए को बचाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया था। शुरू में हमने आवरण को जोड़ने के लिए ब्लाउज हुक का उपयोग करने की कोशिश की थी, लेकिन सफल नहीं हुए। हमने गोंद (ग्लू) का भी इस्तेमाल किया, लेकिन उससे भी कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद हमने कवच के टूटे हुए हिस्सों को जोड़ने के लिए ऑर्थो सर्जिकल पिन का इस्तेमाल किया, लेकिन वह भी काम नहीं आया। बाद में ऑर्थो सर्जिकल पिन की सीरीज बनाई गई और उन्हें जोड़ने के लिए स्टेपलर का इस्तेमाल किया गया।
संरक्षित श्रेणी में है यह कछुआ
प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) बरेली दीक्षा भंडारी ने बताया कि कछुआ जलजीव है जो संरक्षित श्रेणी में आता है। घायल कछुआ बेहद दयनीय स्थिति में था। उसको आईवीआरआई डॉक्टर वैज्ञानिक जीवन प्रदान करने में जुटे हुए हैं। काफी सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि कछुआ पर निगरानी है। हम सभी उसके ठीक होने ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं।

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