पाक से दिल्ली आए हिंदू शरणार्थियों की गुहार, यहां जन्में बच्चों को मिले नागरिकता

नई दिल्ली/एजेंसी। मजबूर होकर करीब 50-60 हिंदू शरणार्थी छह महीने पहले पाकिस्तान से दिल्ली के भाटी माइंस आए थे। इन परिवारों में चार महीने के दौरान छह बच्चों ने भारत में जन्म लिया है। ये लोग वापस जाना नहीं चाहते जबकि भारत की नागरिकता पर संशय बरकरार है। इन शरणार्थियों का कहना है कि वे अपने बच्चों के भारत में भविष्य को लेकर परेशान हैं। उनके मन में चिंता है कि उन्हें भारत की नागरिकता मिलेगी या नहीं?
पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थी वीजा अवधि बढ़ाने और नागरिकता के नियमों में छूट देने की मांग कर रहे हैं। हजारों की संख्या में ऐसे लोग दिल्ली के भाटी माइंस, मजनूं का टीला, लाजपत नगर और सिग्नेचर ब्रिज के जेजे क्लस्टर या अनऑथराइज्ड कॉलोनियों में रह रहे हैं। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो 15-20 साल से यहां रह रहे हैं। कई साल पहले टूरिस्ट या धार्मिक वीजा लेकर ये लोग भारत आए थे। पिछले दो साल से सरकार ने लॉन्ग टर्म वीजा देना भी बंद किया हुआ है। एलटीवी के आधार पर ही सात साल रहने के बाद भारतीय नागरिकता लेने का प्रावधान है। ऐसे में भारतीय नागरिकता की उम्मीद लगाए बैठे शरणार्थी अब चिंता जता रहे हैं।
दिलीप, अमीर चंद, शोभोमल और अमर चंद भी इन्हीं शरणार्थियों में शामिल हैं। इनका आरोप है सरकार इनकी परेशानी पर गौर नहीं कर रही है, यही वजह है कि उन्हें लॉन्ग टर्म वीजा नहीं मिल पा रहा है। अपनी आठ प्रमुख मांगों के साथ इन्होंने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को चिट्ठी भी लिखी है। इसमें मांग की गई है कि भारत में पैदा हुए बच्चों को यहां की नागरिकता मिले। 2014 के बाद आए शरणार्थियों के लॉन्ग टर्म वीजा की अवधि बढ़ा दी जाए। गृह मंत्रालय में पेंडिंग एलटीवी जल्द दिए जाएं। नागरिकता देने के नियमों में छूट दी जाए। कमला कुमारी ने बताया कि वे 2017 में पाकिस्तान के सिंध, हैदराबाद से अपने पैरंट्स के साथ भारत आई थीं। जामिया यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (बीपीटी) का कोर्स किया। लेकिन, आधार कार्ड नहीं बनने की वजह से वे नौकरी या प्रैक्टिस नहीं कर पा रही हैं।

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