गाजियाबाद में 1993 में मरे व्यक्ति को चाहिए साढ़े 3 करोड़ रुपये लोन, फाइनेंस कंपनी भी पहुंचा, हैरान करने वाला मामला

गाजियाबाद/उत्तर प्रदेश। गाजियाबाद में फर्जीवाड़े का एक अनोखा मामला सामने आया है। फ्रॉड ने 1993 में मरे शख्स के नाम पर लोन का आवेदन किया। इसके लिए उसके नाम से फर्जी डॉक्युमेंट्स तैयार करा लिया। फिर, 3 करोड़ 50 लाख रुपये का लोन करवाने के प्रयास का मामला सामने आया है। लोन की सारी प्रक्रिया पूरी भी हो गई, अंत में जब फाइनेंस कंपनी से जुड़े लोग राजनगर में बताए गए एड्रेस पर पहुंचे तो पता चला कि जिसके नाम पर लोन के लिए अप्लाई किया गया है, उसकी मौत 30 साल पहले हो गई है। इसके बाद कंपनी के जलज कुमार की तरफ से कविनगर थाने में शिकायत दी गई।
एसीपी कविनगर अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि मामले में शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर आरोपी राकेश सहगल को गिरफ्तार किया गया है। वह दिल्ली का रहने वाला है। उसके आपराधिक इतिहास के बारे में जानकारी की जा रही है। मामले में शिकायत करने वाले जलज ने बताया कि वह संजय नगर में वी फाइनेंसर्स नाम से फर्म चलाते हैं। जहां लोगों को प्राइवेट फंडिंग करवाई जाती है। यह फंडिंग बिना सिबिल स्कोर चेक किए होती है। नवंबर में उनके पास नोएडा से एक फाइल आई थी, आवेदन करने वाले ने बताया कि उसे राजनगर की कोठी पर 3 करोड़ 50 लाख रुपये की फंडिंग चाहिए। पेपर में नाथन सिंह के नाम से आवेदन था।
‘मृत व्यक्ति’ को भी लेकर पहुंचे थे फाइनेंस कंपनी
फ्रॉड के शातिर अंदाज का पता इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह उस मृत व्यक्ति को भी लेकर फाइनेंस कंपनी के ऑफिस में पहुंच गया। जलज ने बताया कि इस मामले में हमें बताया गया कि नाथन सिंह को एक कंपनी में इनवेस्ट करना है और उसी के लिए लोन चाहिए था। सभी प्रक्रिया होने के बाद नोएडा में आरोपी राकेश सहगल नाथन सिंह बनकर मिला भी था। इस दौरान उसने बताया कि कुछ लोगों से परेशान होकर अपने घर के बाहर अपनी मौत का बोर्ड टांगा हुआ है। जिसे वह जल्द हटा देगा।
कंपनी की इस लोन प्रोसेस में करीब साढ़े तीन लाख रुपये खर्च किए थे। इस मामले में जब कंपनी के लोग कोठी पर गए तो वहां उन्हें जानकारी हुई कि नाथन सिंह की 1993 में मौत हो चुकी है। उनका डेथ सर्टिफिकेट भी उन्हें दिखाया गया। ठगी का अहसास होने पर उन्होंने पुलिस से शिकायत की।

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