2660 जाली कंपनियां बनाई और कर दिया 15 हजार करोड़ का फर्जीवाड़ा

  • नोएडा फर्जीवाड़ा गैंग में शामिल दो सीए समेत 8 गिरफ्तार
  • इनपुट टैक्स क्रेडिट लेकर सरकार को लगाया चूना
  • पकड़े गए आरोपियों के पास मिला 6.35 लाख लोगों का डेटा
  • दिल्ली में खोला था ऑफिस, पुलिस कर रही फरार की तलाश

नोएडा। उत्तर प्रदेश के नोएडा से बड़े फर्जीवाड़ा का पता चला है। फर्जी दस्तावेजों से जीएसटी नंबर सहित फर्म बनाकर सरकार को 15 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के राजस्व नुकसान पहुंचाने वाले गैंग का पुलिस ने खुलासा किया है। थाना सेक्टर-20 पुलिस ने इस मामले में 2 सीए समेत 8 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी फर्म का फर्जी बिल बनाते थे और जीएसटी रिफंड (इनपुट टैक्स क्रेडिट) प्राप्त कर सरकार को चूना लगाते थे। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद 2660 फर्जी कंपनियां मिली हैं। इनमें 15 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का बीते 4.5 साल में आरोपियों ने जीएसटी रिफंड लिया है। नोएडा पुलिस आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत केस दर्ज कर संपत्ति कुर्क की कार्रवाई करेगी। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने फर्जी कंपनियां बनाकर जीएसटी रिफंड के नाम पर चूना लगे रहे गिरोह को पकड़ने वाली टीम को 25 हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा की है।
मई में सेक्टर-20 थाने में पैन कार्ड से फर्जी कंपनी खोलने के प्रयास का केस दर्ज कराया था। पुलिस ने मामले की जांच की तो हजारों करोड़ की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ। गिरफ्त में आए आरोपियों की पहचान यासीन शेख, आकाश सैनी, राजीव, अतुल सेंगर, दीपक मुरजानी, अश्वनि, विनीता के रूप में हुई है। पुलिस ने सभी को मधु विहार (दिल्ली) स्थित जिबोलो कार्यालय से गिरफ्तार किया। दीपक मुरजानी मास्टरमाइंड है। सभी आरोपी सरकार को जीएसटी रिफंड लेने के लिए दो टीमों में काम करते थे। दोनों टीमें से दूसरे से मिलती नहीं थीं। बात करने के लिए वॉट्सऐप कॉल करते थे।
पहली टीम फर्जी फर्म तैयार करने के लिए सर्विस प्रोवाइडर कंपनी से अवैध रूप से डेटा (पैन नंबर) खरीदती थी। इसके बाद अशिक्षित लोगों को 1000-1500 रुपयों का लालच देकर उनके आधार कार्ड में फर्जी मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड करा लेते थे। इसके बाद प्राप्त डेटा से ऑनलाइन रेंट एग्रीमेंट और बिजली बिल को डाउनलोड करते थे। डाउनलोड किए गए रेंट एग्रीमेंट और बिजली बिल को एडिट कर फर्म का एड्रेस तैयार किया जाता था। अशिक्षित लोगों के आधार कार्ड के नाम को सर्विस प्रोवाइडर कंपनी से खरीदे गए पैन कार्ड डेटा में सर्च किया जाता था। कुछ नाम कॉमन आने पर उनके नाम के आधार कार्ड और अन्य फर्जी दस्तावेजों को फर्जी फर्म और उसका जीएसटी नंबर रजिस्टर कराने के लिए जीएसटी की वेबसाइट पर लॉगिन करते थे।
फर्म रजिस्टर कराने के लिए जीएसटी विभाग से एक वेरिफिकेशन कोड आधार कार्ड में आरोपियों की ओर से रजिस्टर्ड कराए मोबाइल नंबर पर पहुंचता था। ओटीपी को पोर्टल में दर्ज कर आरोपी फर्जी फर्म तैयार कर लेते थे। ऐसी रजिस्टर्ड कराई गई फर्जी फर्म 80 से 90 हजार रुपए में दूसरी टीम को बेच दी जाती थी। इसी तरह से आरोपी अब तक 2660 फर्जी जीएसटी फर्म तैयार कर चुके हैं। आरोपियों की दूसरी टीम पहली टीम से खरीदी गई कंपनी के फर्जी बिल तैयार कर सरकार से जीएसटी रिफंड लेती थे।
इसी तरह से आरोपी एक कंपनी से हर महीने 4 से 5 करोड़ का फर्जी बिल तैयार कर सरकार से जीएसटी रिफंड लेते थे। पहली टीम 8 फर्जी फर्म उपयोग कर रही थी। इनके फर्जी खाते झमेली चौपाल, जिबोलो, रजनीश झा, विवेक झा के नाम से अलग-अलग बैंकों में पाए गए। पकडे गए आरोपियों की दूसरी टीम में आंछित गोयल, प्रदीप गोयल, अर्चित,मयूर, चारू नागपाल, रोहित नागपाल, दीपक सिंघल अभी फरार है पुलिस उनको पकड़ने में जुटी हुई है।
पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से तीन कार बरामद हुईं हैं। इसमें से एक कार पर दिल्ली सरकार लिखा हुआ है। पुलिस ने 12.66 लाख रुपए, 32 मोबाइल फोन, कम्प्यूटर सिस्टम, हार्ड डिस्क और फर्जी पैन और आधार कार्ड बरामद किए हैं। फर्जी कंपनियों को जीएसटी नंबर कैसे मिला? इसमें किसी बड़े जीएसटी अधिकारी की भागीदारी तो नहीं है? इसी की जांच के लिए नोएडा पुलिस से जीएसटी केंद्र और प्रदेश मुख्यालय को लेटर भेजकर जांच करने के लिए कहा है। फर्जी कंपनियां कौन है इसकी जांच के लिए स्पेशलिस्ट को लगाया गया है।

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