मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर लेता था 35 हजार, दलाल समझाते पूरा काम, हुआ गिरफ्तार

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार की ओर से फेसलेस सिस्टम शुरू करने के बावजूद अवैध रूप से ट्रांसफर किए गए ऑटो के परमिट की 3500 से ज्यादा मामलों में ऑफलाइन पर्ची काटी गई है। परमिट ट्रांसफर कराने के लिए जमा की गई फीस की ऑफलाइन पर्चियां बुराड़ी अथॉरिटी की हैं। गिरफ्तार मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर सुरेश कुमार ने 3500 अवैध परमिट ट्रांसफर के लिए वेरीफिकेशन और अप्रूवल दिया। हरेक के 30 से 35 हजार रुपये लिए गए। यह आंकड़ा अभी शुरुआती जांच का है। इसमें और भी इजाफा होने के आसार हैं। एसीबी के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि फेसलेस होने के बावजूद इसमें मौजूद कर्मियों का अथॉरिटी अधिकारी, डीलर और फाइनेंसर फायदा उठा रहे हैं।
चलता था बुराड़ी अथॉरिटी में पूरा खेल
फाइनेंसर और डीलर परमिट को अवैध तरीके से किसी और के नाम ट्रांसफर करने के इंतजाम करने के बाद अथॉरिटी पर कब्जा जमाए हुए दलालों के पास जाते हैं। ये दलाल ऑटो के मृत मलिक को जिंदा दिखाकर उसके फर्जी कागजात अथॉरिटी में जमा करा देते थे। इसके बाद ये कागजात मोटर वाहन इंस्पेक्टर सुरेश कुमार के पास जाते थे। दलाल इंस्पेक्टर को पहले ही केस के बारे में बता देते थे। यहां पर इंस्पेक्टर को ऑटो के असली मालिक, उसके कागजात, फोटो, घर, ऑटो-परमिट खरीदने वाले के कागजातों की वेरीफेशन करनी होती है। मगर इंस्पेक्टर सुरेश कुमार ऑफिस में बैठे ही परमिट ट्रांसफर की बिना वेरीफिकेशन किए ही अप्रूवल दे देता था।
300 लोगों से पूछताछ के बाद खुलासा
एसीबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एसीबी प्रमुख मधुर वर्मा की देखरेख में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त श्वेता सिंह चौहान, एसीपी जनरैल सिंह और इंस्पेक्टर लक्ष्मी की टीम ने करीब 300 से लोगों से पूछताछ के बाद बुराड़ी अथॉरिटी में चल रहे इस रैकेट का खुलासा हुआ। इस मामले में कई और अधिकारी कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है।
डीलर बीमा तो पर्ची दलाल कटवाता था
एसीबी अधिकारियों के अनुसार जांच में ये बात सामने आई है कि ऑटो किसी और का, खरीद कोई और रहा है। ऐसे में ऑटो का बीमा डीलर करवाता था और ऑटो परमिट ट्रांसफर की पर्चियां दलाल करवाते थे। पुलिस को शुरुआती जांच में पता लगा कि 450 ऑटो परमिट के ट्रांसफर की पर्चियां दलालों ने कटवा रखी हैं। कानूनन बीमा व फीस की पर्चियां ऑटो मालिक ही कटवा सकता है। कोर्ट के आदेश या किसी खास केस में ही पर्ची ऑफलाइन कटती है।
रामआसरे के केस से सामने आया मामला
एसीबी अधिकारियों ने बताया कि जांच में ये बात भी सामने आई है कि मालिक की मौत होने के बावजूद ऑटो व परमिट के ट्रांसफर के काफी केस आ रहे थे। इसकी अथॉरिटी में शिकायत दी गई थी। मगर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। बताया जा रहा है कि एक बार विभागीय स्तर पर विजिलेंस जांच भी हुई थी। जांच के बाद कहा गया कि मालिक जिंदा थे। इसके बाद कुछ लोगों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई। बिहार निवासी ऑटो चालक रामआसरे के ऑटो का नंबर हाईकोर्ट में दिया गया। हाईकोर्ट ने इस मामले में एसीबी को जांच के आदेश दिए।
ऐसे चलता है परमिट ट्रांसफर का गोरखधंधा
अगर कोई ऑटो चालक किसी डीलर के पास जाता है तो ये उसका 30 से 35 हजार रुपये लेकर परमिट व ऑटो ले लेते हैं। इसके बाद ये किसी को बेच देते हैं और खरीदने वाले की छह लाख रुपये की किस्त बांध देते हैं। इसके बाद ये फिर ऑटो के असली मालिक को बुलाते हैं। इस समय में असली मालिक या तो मर चुका होता है या फिर दिल्ली से वापस अपने राज्य जा चुका होता है। इसके बाद से ऑटो व उसके परमिट को बेच देते हैं और उसकी फिर किस्त बांध देते हैं। ये परमिट व ऑटो खरीदने वाले को बुराड़ी अथॉरिटी में दलाल के पास भेज देते हैं। आरोपी अथॉरिटी में ऑटो चालक को जिंदा दिखाकर दूसरे को बेचने की बात कहते हैं। इस तरह से आरोपी ऑटो को खरीदने वाले से मोटी रकम वसूलते हैं। कई बार आरोपी ऑटो को मायापुरी इलाके में ले जाकर स्क्रेप करवा देते है। ये फिर से नए ऑटो के लिए आवेदन कर देते हैं। ऐसे में ये ऑटो मालिक से फिर मोटी रकम वसूल लेते हैं।
जिंदगी भर के लिए दिया जाता है परमिट
जानकारों के अनुसार, ऑटो का परमिट जिंदगी भर के लिए दिया जाता है। रजिस्ट्रेशन 15 वर्ष का होता है। अगर ऑटो चालक किसी को ऑटो बेचता है तो उसे पहले पांच साल ऑटो को अपने पास रखना और चलाना जरूरी होता है। इसके बाद वह ऑटो और परमिट को किसी दूसरे को बेच देता है। अगर ऑटो चालक मर जाता है तो उसका ऑटो और परमिट उसके परिवार के सदस्य के नाम हो सकता है। इसे किसी दूसरे को नहीं बेचा जा सकता।
फाइनेंस करने का नहीं होता है अधिकार
एसीबी के अधिकारियों के अनुसार, जितने भी फाइनेंसर पकड़े गए हैं, उनके पास किसी भी ऑटो को फाइनेंस करने का अधिकार नहीं है। ये लोग ऑटो चालकों को गुमराह कर किसी और कंपनी के नाम पर फाइनेंस करते हैं। जबकि, दूसरी कंपनी की एनओसी ऑटो चालक को देते हैं।
ऑटो चालक को जिंदा दिखाने के 25 मामले सामने आए
एसीपी अधिकारियों ने बताया कि मर चुके ऑटो चालक को अथॉरिटी में जिंदा कर परमिट को किसी और को बेचने के 25 केस सामने आ चुके हैं। बृहस्पतिवार तक ये मामले 19 थे। अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच शुरुआती दौर में है। इस तरफ के काफी मामलों के सामने आने की संभावना है।
कुछ ऑटो चालकों की 2013 में मौत हो चुकी
एसीबी के एक अधिकारी ने बताया कि जो मामले सामने आए हैं उनकी जांच में ये बात सामने आई है कि कुछ ऑटो चालकों की वर्ष 2013 में मौत हो गई थी। इनके परमिट 2021 में बेचे गए हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button