ढाका में बेकाबू भीड़ ने भारतीय सांस्कृतिक केंद्र को तबाह किया, चार हिंदू मंदिरों में भी तोड़फोड़

Uncontrolled mob destroyed Indian cultural center in Dhaka, four Hindu temples were also vandalized

ढाका/एजेंसी। बांग्लादेश में जारी हिंसा के बीच ढाका में अनियंत्रित भीड़ द्वारा एक भारतीय सांस्कृतिक केंद्र में तोड़-फोड़ की गई है। इसके अलावा चार हिंदू मंदिरों को भी आंशिक रूप से नुकसान पहुंचाया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों और भारतीय समुदाय के नेताओं ने इस बात की जानकारी दी है।
‘शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने के बाद स्थिति बिगड़ी’
ढाका में हिंदू बौद्ध ईसाई एकता समिति के नेता काजोल देबनाथ ने इस बारें में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि देशभर में जारी हिंसा के बीच कम से कम चार हिंदू मंदिरों को आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त किए जाने की सूचना मिली है। काजोल देबनाथ के अनुसार, प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद स्थिति और भी अधिक बिगड़ गई है। इस वजह से कुछ हिंदू समुदायों के नेता डरे हुए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अनियंत्रित भीड़ ने ढाका के धानमंडी क्षेत्र में स्थित इंदिरा गांधी सांस्कृतिक केंद्र में तोड़-फोड़ की है। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदर्शनकारियों ने ढाका के कई क्षत्रों में आगजनी की घटना को अंजाम दिया है।
ढाका में मौजूद बंगबंधु भवन में भी आग लगाई गई
उधर, ढाका में मौजूद बंगबंधु भवन में भी आग लगाई गई है। बंगबंधु भवन को बंगबंधु मेमोरियल म्यूजियम भी कहा जाता है। यह भवन प्रधानमंत्री शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान को समर्पित किया गया है, जिनकी वर्ष 1975 में हत्या की गई थी। बांग्लादेश में जारी हिंसा के बीच प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्तीफा देकर देश छोड़ दिया है। अब मुल्क में अंतरिम सरकार कार्यभार संभालने जा रही है। बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमां ने सोमवार को इसकी घोषणा की। एलान ऐसे वक्त किया गया, जब पिछले दो दिनों में शेख हसीना की सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमां प्रदर्शनकारियों से अनुरोध किया है कि अब हिंसा करना बंद कर दें।
वर्ष 2010 में हुआ था इंदिरा गांधी सांस्कृतिक केंद्र का उद्घाटन
आपको बता दें कि वर्ष 2010 के मार्च महीने में ढाका में इंदिरा गांधी सांस्कृतिक केंद्र का उद्घाटन किया गया था। यहां भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय सांस्कृतिक संबंधों की प्रगति के लिए अलग अलग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता था। इस केंद्र में सांस्कृतिक संगोष्ठियों और कार्यशालाओं का भी आयोजन किया जाता था। इसके अलावा इस केंद्र में एक पुस्तकालय भी तैयार किया गया था, जहां भारतीय कला, संस्कृति, राजनीति और अर्थशास्त्र से जुड़ी 2100 से अधिक पुस्तकें रखीं गईं थीं।

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