यूपी में तमिलनाडु के गिरोह की एंट्री, 50 लाख के जेवर बरामद

एसयूवी में सोना-खाना, मोबाइल का इस्तेमाल नहीं

  • तमिलनाडु के चोर गिरोह ने रायबरेली पुलिस को काफी परेशान किया
  • गिरोह का कोई डिजिटल निशान नहीं पुलिस ने मुखबिरों के नेटवर्क से पकड़ा
  • धार्मिक समारोहों में लोगों को निशाना बनाते थे गिरोह के सदस्य
  • चार महिलाएं और दो पुरुष सदस्य गिरफ्तार

रायबरेली/उत्तर प्रदेश। रायबरेली मेंतमिलनाडु के एक चोर गिरोह ने पुलिस को काफी दिनों तक परेशान किया। ये गिरोह चेन स्नैचिंग और दूसरी चोरियों में माहिर है। सबसे बड़ी समस्या ये थी कि आधुनिक तकनीक और पुलिस की नजरों से बचने के लिए ये गिरोह कोई भी डिजिटल निशान नहीं छोड़ता था। गिरोह के सदस्य सीसीटीवी से बचकर रहते थे मोबाइल फोन तक इस्तेमाल नहीं करते थे। पुलिस के लिए ये पहेली बन गए थे। आखिरकार, पुलिस के पुराने और भरोसेमंद मुखबिरों के नेटवर्क ने ही इस गिरोह को पकड़वाया।पुलिस के अनुसार यह गिरोह रायबरेली और उन्नाव जिलों में सक्रिय था। इसमें 2 पुरुष और 4 महिलाएं शामिल थीं। सभी कोयंबटूर, तमिलनाडु के रहने वाले हैं। ये धार्मिक समारोहों और मेलों में लोगों को निशाना बनाते थे। किसी की नजर में आने से बचने के लिए ये एक एसयूवी गाड़ी में रहते थे, जिसमें खाना बनाने का पूरा सामान, यहां तक कि गैस सिलेंडर भी मौजूद था। महिलाएं गाड़ी में ही खाना बना लेती थीं। इससे उन्हें रेस्टोरेंट जाने की ज़रूरत नहीं पड़ती थी, जहां सीसीटीवी में उनकी तस्वीर कैद हो सकती थी।
पुलिस ने अपने मुखबिरों का जाल बिछाया। सूचना मिलने पर पुलिस ने बुधवार को गिरोह के सभी सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार लोगों के नाम रोहित मुत्तुस्वामी, आनंद मारस्वामी, ज्योति मनकर, शांति पार्वतीवन, सुधा निवासन और आशा निवासन हैं। पता चला कि पुलिस को चकमा देने के लिए इन लोगों ने दिल्ली के फर्जी पते से अपने पहचान पत्र बनवा रखे थे। पुलिस ने इनके पास से 50 लाख रुपये कीमत की सोने की चेन, अंगूठियां और दूसरे जेवर बरामद किए हैं।
रायबरेली के अपर पुलिस अधीक्षक, संजीव कुमार सिन्हा ने बताया, “गिरोह के सदस्य मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करते थे और न ही किसी होटल या लॉज में रुकते थे। ये धार्मिक समारोहों और मेलों में शामिल होते थे और चेन और हार चुराते थे।” पूरी प्लानिंग के साथ काम करते थे। संजीव सिन्हा ने आगे बताया, “गिरोह के सदस्यों ने दिल्ली में हिंदी सीखी थी ताकि किसी को शक न हो कि वे दक्षिण भारत से हैं। गिरोह दिन में अलग-अलग इलाकों में रेकी करता था और रात में चोरी की वारदात को अंजाम देता था।” अधिकारी ने बताया कि ये आपस में तमिल भाषा में बात करते थे ताकि दूसरे लोग उनकी बातें न समझ सकें। गिरोह के सदस्यों पर दूसरे राज्यों में भी मामले दर्ज हैं।

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