गोरक्षपीठ का आशीर्वाद लेकर योगी के ‘गढ़’ में रण में उतरेंगे रवि किशन, बांसगांव से चौथी बार कमलेश पासवान को टिकट

गोरखपुर/उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश की गोरखपुर की दो लोकसभा सीटों पर भाजपा ने अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। शनिवार की शाम बीजेपी ने प्रत्याशियों की लिस्ट जारी करते हुए गोरखपुर की सदर और बांसगांव सीट से पूर्व सांसद रवि किशन शुक्ला और कमलेश पासवान को ही अपना प्रत्याशी बनाया है। टिकट का ऐलान होते ही दोनों प्रत्याशियों ने गोरखनाथ मंदिर पहुंचकर गुरु गोरखनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की।
लोकसभा चुनाव 2024 का संग्राम शुरू हो चुका है। प्रमुख पार्टियों ने जाति और क्षेत्रीय समीकरण बैठाते हुए प्रत्याशियों की घोषणा करनी शुरू कर दी है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने शुरुआत में ही कई सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए थे, लेकिन बीजेपी ने अपने पत्ते नहीं खोले थे। शनिवार की शाम भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने भी कई सीटों पर प्रत्याशियों के नाम पर मुहर लगा दी। गोरखपुर की दोनों बहुप्रतीक्षित सीट से बीजेपी ने एक बार फिर से पूर्व प्रत्याशियों पर ही अपना दांव लगाया है जो पिछली बार सांसद रहे हैं।
सदर सीट पर रवि किशन और बांसगांव लोकसभा सीट पर कमलेश पासवान पर को फिर उम्मीदवार बनाकर यह साबित कर दिया है कि बीजेपी किसी प्रकार का रिस्क लेने के मूड में नहीं है। प्रत्याशियों ने टिकट की घोषणा होने के बाद गुरु गोरखनाथ मंदिर जाकर बाबा का आशीर्वाद लिया और गोरखपुर में मौजूद सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और चुनावी रणनीति पर चर्चा की। इस दौरान कुशीनगर के प्रत्याशी विजय दुबे भी मौजूद रहे।
पिछले कई दिनों से चल रहे कयासों पर अब विराम लग चुका है, क्योंकि प्रदेश में मुख्य प्रतिद्वंदी समाजवादी पार्टी और भाजपा ने गोरखपुर सीट से अपने-अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी ने काजल निषाद पर अपना दांव लगाया है तो वहीं भाजपा ने अपने पूर्व सांसद रवि किशन को एक बार फिर से मैदान में उतारा है। यानी अब लड़ाई ऐक्ट्रेस वर्सेस ऐक्टर के बीच होना तय है। टिकट बंटवारे के बाद आम चर्चा शुरू हो गई है कि चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है क्योंकि टिकट की घोषणा होने के बाद से ही समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी काजल निषाद लगातार भाजपा पर हमलावर हैं। वहीं रवि किशन ने चुप्पी साध रखी थी लेकिन अब देखना होगा कि टिकट मिलने के बाद रवि किशन किस तरह अपने प्रतिद्वंदियों को जवाब देते हैं।
बात करें रवि किशन के 5 साल के कार्यकाल की तो कुल मिलाकर उनका कार्यकाल संतोषजनक रहा है। पहली बार चुनाव मैदान में आने से पूर्व उन पर कई प्रकार के इल्जाम लगे थे। जैसे वह बाहरी व्यक्ति हैं, ऐक्टर हैं, क्षेत्र में कहां समय दे पाएंगे? लेकिन कुछ हद तक इन सारी बातों को रवि किशन ने गलत साबित किया और ज्यादातर समय अपने संसदीय क्षेत्र में बने रहे। वह लगातार लोगों के बीच में उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ कई मंचों पर अपनी उपस्थिति भी दर्ज कराई और लोगों के बीच लोकप्रिय बने रहे।
शायद इसी बात का इनाम उन्हें एक बार फिर से लोकसभा के टिकट के रूप में मिला है। बांसगांव लोकसभा सीट की बात करें तो हर बार कमलेश पासवान को लेकर नकारात्मक बातें होती हैं, लेकिन अंत में टिकट उन्हें ही मिलता है और वह चुनाव जीत भी जाते हैं। हालांकि, इस बार भाजपा द्वारा बनाए गए अपने नियम के कारण तीन बार से ज्यादा सांसद रहने पर टिकट कटने की आशंका जताई जा रही थी लेकिन पार्टी ने एक बार फिर से उन पर दांव लगाया है।
बांसगांव सुरक्षित लोकसभा सीट
बांसगांव सीट देश की सुरक्षित सीटों में से एक है जो 1957 से अब तक सुरक्षित सीट रही है। यहां सबसे अधिक 8,36000 ओबीसी मतदाता हैं तो वही सामान्य मतदाता भी 5 लाख से ज्यादा हैं। यदि बात करें अनुसूचित मतदाताओं की तो इनकी संख्या भी ढाई लाख से ज्यादा है और इस क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी डेढ़ लाख के करीब है। अनुसूचित जाति में भी पासवान जाति के मतदाता सर्वाधिक है। हालांकि इस क्षेत्र में सामान्य वर्ग खासकर राजपूत जाति का वर्चस्व रहा है। पूर्व में कई बार खूनी संघर्ष भी हो चुका है।

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