नोएडा में किसानों ने कपड़े उतार किया प्रदर्शन

नोएडा। भारतीय किसान परिषद के नेतृत्व में नोएडा प्राधिकरण पर करीब 12 दिनों से धरना प्रदर्शन जारी है। इसके अलावा सेक्टर-24 स्थित एनटीपीसी पर भी लगभग 5 दिनों से किसानों का आंदोलन जारी है। इसी क्रम में आज यानी शुक्रवार को किसानों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। वहीं 26 दिसंबर को प्राधिकरण में महापंचायत करने का निर्णय लिया गया। पहलवानों ने दंड-बैठक लगाकर शक्ति प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों और किसानों के बीच हुई बातचीत विफल रही। प्राधिकरण के अधिकारी किसानों की सभी मांगों पर सहमत नहीं हो सके।
भारतीय किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर खलीफा उर्फ सुखबीर पहलवान ने बताया कि बड़ी संख्या में युवा किसान और पहलवान नोएडा प्राधिकरण पर पहुंचकर अर्धनग्‍न होकर प्रदर्शन किया। इसके अलावा किसानों का एनटीपीसी पर भी अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन जारी है। इस बार किसान अपनी मांगों को पूरा कराए बिना आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।
उन्होंने बताया कि इन प्रदर्शनों के निरंतर जारी रहने के बाद भी अधिकारी उनकी मांगों को लेकर गंभीर नहीं हैं। किसानों से वह कोई वार्ता नहीं कर रहे हैं। इससे नाराज किसान इस बार आरपार की लड़ाई के मूड में हैं। किसानों की महापंचायत का आयोजन 26 दिसंबर को नोएडा प्राधिकरण पर किया जाएगा। यहां पर जिले के सभी गांवों के किसान जुटेंगे। महापंचायत में ही आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
इसमें सर्वसम्मिति से फैसला लिया जाएगा कि आंदोलन में आगे क्या करना है। किसान नेता अतुल यादव ने बताया कि किसानों को 10 प्रतिशत आबादी के भूखंड, 64.7 प्रतिशत मुआवजा देने सहित कई मांगों को लेकर संघर्ष किया जा रहा है। जब तक हमारा हक दिया नहीं जाएगा, तब तक लड़ाई जारी रहेगी। किसान नेता अतुल यादव ने बताया कि किसानों को 10 प्रतिशत आबादी के भूखंड, 64.7 प्रतिशत मुआवजा देने सहित कई मांगों को लेकर संघर्ष किया जा रहा है। जब तक हमारा हक दिया नहीं जाएगा, तब तक लड़ाई जारी रहेगी। हमें केवल झूठे वादे नहीं चाहिए, अब हमें ठोस कार्रवाई चाहिए।
तत्काल प्रभाव से हमारा मुआवजा चाहिए। हमारे प्लॉट चाहिए। हमें सुविधाएं चाहिए और हम इसको लेकर आरपार की लड़ाई लड़ने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि भूमि अधिग्रहण के 50 साल बाद भी किसानों को उनका हक नहीं दिया गया है। किसान अपनी मांगों को लेकर काफी सालों से लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके बावजूद इंसाफ की रोशनी कहीं भी दिखाई नहीं दे रही है, जिसकी वजह से किसान दोबारा प्राधिकरण पर धरना देने को मजबूर हैं।

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