गाजियाबाद कमिश्नरेट बने हो गए 20 दिन, पूरी तरह लागू नहीं हो पाई प्रणाली

गाजियाबाद ब्यूरो। कमिश्नरेट बने हुए 20 दिन बीत गए हैं लेकिन कमिश्नरी प्रणाली अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं हो पाई है। पुलिस अधिकारी अभी पुलिस आयुक्त, डीसीपी और एसीपी के लिए कोर्ट शुरू करे के लिए जगह तलाशने में ही जुटे हैं। कुछ कोर्ट व कार्यालय के जगह चिन्हित की गई हैं इनमें से कुछ स्थाई हैं जबकि कुछ अस्थाई हैं। लेकिन अभी शुरू नहीं होने से पुलिस कमिश्नर को मिले प्रशासनिक अधिकारों वाले कार्य पूर्व की तरह ही किए जा रहे हैं। पुलिस आयुक्त अजय कुमार मिश्रा ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर कोर्ट व पुलिस अधिकारियों के कार्यालय के लिए जगह तलाश की जा रही है। पुलिस आयुक्त, एडिशनल पुलिस आयुक्त, डीसीपी और एसीपी के लिए कई सरकारी भवन व कार्यालय चिन्हित किए गए हैं। जल्द ही सभी कोर्ट शुरू कर दी जाएगी। कमिश्नरेट के नए भवन के लिए भी राजनगर एक्सटेंशन और मधुबन बापूधाम क्षेत्र में जमीन देखी गई है। जल्द ही इस पर निर्णय लेकर शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा और मुहर लगने के बाद इसका निर्माण शुरू कराया जाएगा।

पुलिस आयुक्त की कोर्ट कमिश्नरेट कार्यालय में पूर्व के सीओ सदर दफ्तर में चलेगी। कमिश्नरेट कार्यालय में स्थित एसपी ग्रामीण के कार्यालय में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त का कार्यालय होगा। पुलिस आयुक्त भवन में ही उनकी उनकी कोर्ट होगी। डीसीपी नगर की कोर्ट के लिए नगर कोतवाली, डीसीपी ग्रामीण की कोर्ट के लिए मुरादनगर क्षेत्र तथा डीसीपी ट्रांस हिंडन की कोर्ट के लिए मोहनगर में जगह चिन्हित की गई है। इसके अलावा एसीपी कविनगर की कोर्ट के लिए मधुबन बापूधाम स्थित सामुदायिक भवन या कविनगर सामुदायिक भवन चिन्हित किया गया है। एसीपी नंदग्राम के कार्यालय और कोर्ट के लिए महिला थाना, एसीपी वेव सिटी के कार्यालय और कोर्ट के लिए आदित्य वल्र्ड सिटी, एसीपी मसूरी की कोर्ट के लिए दुहाई स्थित एनसीआरटीसी का भवन, एसीपी इंदिरापुरम की कोर्ट के लिए वसुंधरा सेक्टर-16 स्थित आवास विकास का भवन, एसीपी लोनी की कोर्ट के लिए इंदिरापुरी पुलिस चौकी, एसीपी साहिबाबाद की कोर्ट के लिए साहिबाबाद, एसीपी मोदीनगर की कोर्ट के लिए तहसील के पास सरकारी कार्यालय चिन्हित किया गया है।

2009 बैच के आईपीएस दिनेश कुमार पी. ने गाजियाबाद कमिश्नरेट में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। दिनेश कुमार पी. पीलीभीत, आगरा, झांसी समेत 11 जिले में तैनात रह चुके हैं।

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