भारत के पास हिंद महासागर में ‘पाताल के रास्ते’ का खुल गया रहस्य

जानें समंदर में बने विशालकाय गड्ढे की सच्चाई

  • हिंद महासागर में मौजूद रहस्यमय ग्रेविटी होल का रहस्य पता चल गया है
  • लाखों वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र में पानी का स्तर बहुत नीचे है
  • एक पुराने सागर की मौत के बाद इस क्षेत्र का निर्माण हुआ है

लंदन/एजेंसी। हमारी धरती अपने अंदर तमाम रहस्यों को समेटे हुए हैं। समंदर के रहस्य तो ऐसे हैं जिन्होंने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है। ऐसा ही एक रहस्य भारत के पास स्थित हिंद महासागर के अंदर मौजूद है, जहां पानी के बीच एक विशाल गड्ढा नजर आता है। यह एक विशाल महासागरीय क्षेत्र है, जहां समंदर में कहीं और तुलना में समुद्र का स्तर 348 फीट (106 मीटर) कम है। 1948 में खोजे गए इस रहस्यमय गड्ढे को वैज्ञानिकों ने ग्रेविटी होल नाम दिया था। इसकी उत्पत्ति हाल ही तक रहस्य बनी रही थी, लेकिन अब इससे पर्दा हट गया है।
समंदर में पानी के बीच यह विशालकाय गड्ढा प्रकृति की अनोखी रचना है, जो 31 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह समुद्री क्षेत्र भारत के दक्षिण-पश्चिम में 1200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। समंदर के बीच मौजूद इस रहस्यमय गड्ढे को पाताल के दरवाजा भी कहा जाता रहा है। हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि इस क्षेत्र में गुरुत्वाकर्षण खिंचाव इतना कमजोर है कि पानी का स्तर बाकी के हिस्से की तुलना में नीचे चला गया है।
खोज के बाद से ही वैज्ञानिक इसकी उत्पत्ति को समझने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन इसका उत्तर 2023 में मिला। जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, इस क्षेत्र का निर्माण 14 करोड़ साल पहले हुआ था। शोधकर्ताओं ने पृथ्वी के मेंटल और टेक्टोनिक प्लेटों की गति को समझने के लिए 19 कम्यूटर मॉडल का उपयोग किया।
स्टडी में पाया गया है कि इसके निर्माण के पीचे टेथीज सागर है जो अब खत्म हो गया है। इसमें कहा गया है कि हिंद महासागर के रहस्यमय ग्रेविटी होल का निर्माण टेथीज सागर की मौत के बाद बना। टेथीज सागर पृथ्वी की पपड़ी (क्रस्ट) के हिस्से पर था, लेकिन 18 करोड़ साल पहले गोंडवाना के टूटने के दौरान यह यूरेशियन प्लेट के नीचे दब गया। इस तरह क्रस्ट के टुकड़े मेंटल के नीचे डूब गए। गोंडवाना एक प्राचीन महाद्वीप था, जो 18 करोड़ साल पहले टूट गया था। वर्तमान अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, भारतीय उपमहाद्वीप और अरब प्रायद्वीप इसका ही हिस्सा थे।
स्टडी के अनुसार, भारत भी अफ्रीका का हिस्सा हुआ करता था, लेकिन करोड़ों साल पहले यह यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट की ओर खिसकने लगा। इस प्रक्रिया में टेथीज सागर का सी बेड (समुद्री तल) मेंटल के नीचे आने लगा था। इस तरह टेथीज सागर के ऊपर हिंद महासागर का निर्माण हुआ। टेथीज सागर का तल हिंद महासागर के नीचे दबा हुआ है और इसका मैग्मा पिघल रहा है। यह कम घनत्व वाला ऊपर की ओर उठा, जिससे क्षेत्र का कुल द्रव्यमान कम हो गया और गुरुत्वाकर्षण खिंचाव कमजोर हो गया। इसकी वजह से पानी का स्तर यहां दुनिया के मुकाबले नीचे चला गया।

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