पाकिस्तान से नेपाल के रास्ते नकली नोट पहुंचे दिल्ली

नई दिल्ली/एजेंसी। पाकिस्तान से नेपाल और बांग्लादेश बॉर्डर के रास्ते नकली नोटों को दिल्ली-एनसीआर में खपा रहे अंतर्राष्ट्रीय एफआईसीएन (नकली भारतीय मुद्रा नोट) रैकेट की दो अहम कड़ियों को स्पेशल सेल ने पकड़ा है। आरोपियों में बिहार के जिला शिवहर निवासी राम प्रवेश और रक्सौल निवासी अली असगर हैं। इनके पास से 500 रुपये के कुल 582 (2.91 लाख) नोट और 5 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गैंग का सरगना आसिफ नाम का शख्स है। वो पाकिस्तान के अंसारी के साथ मिलकर नकली नोटों को वहां से मंगवा रहा था। इसके बाद इन नोटों को दिल्ली-एनसीआर के अलावा देश के दूसरे हिस्सों में ऑन डिमांड भेजा दिया जाता था।स्पेशल सेल को मिली थी खबर
स्पेशल सेल डीसीपी मनोज सी के मुताबिक, टीम को जानकारी मिली थी कि दिल्ली-एनसीआर में नकली नोट खपाए जा रहे हैं। इसके लिए जानकारी जुटाई गई। पता चला कि नकली नोट नेपाल से बिहार के रक्सौल होते हुए दिल्ली आते हैं। इनमें एक शख्स नकली नोटों के साथ दिल्ली के आनंद विहार इलाके में आने वाला है। सूचना के बाद एक टीम ने आनंद विहार फुट ओवर ब्रिज के पास ट्रैप लगाया। टीम ने आरोपी को दबोच लिया। इसके पास से कुल 578 नोट बरामद किए गए। पूछताछ के दौरान राम प्रवेश ने बताया कि वह दिल्ली-एनसीआर में ठेकेदारी का काम करता है। धंधा ठीक न चलने की वजह से वह अली असगर के संपर्क में आया जो नकली नोटों का धंधा करता था। राम प्रवेश की निशानदेही पर एक टीम को बिहार के मुजफ्फरपुर भेज दिया। वहां से आरोपी अली असगर को दबोच लिया गया। इसके पास से 500 के चार नोट बरामद हुए। पुलिस दोनों से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।
आईएसआई कर रहा सपोर्ट
नोटबंदी को आठ साल हो चुके। मगर चैलेंज बरकरार हैं। एनसीआरबी के हिसाब से नोटबंदी के बाद पहले साल में नकली नोटों के अवैध कारोबार में कमी आई थी, लेकिन बाद में रफ्तार पकड़ ली। पुलिस अफसर के मुताबिक, नकली करंसी से भारत की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की यह अंतरराष्ट्रीय साजिश है, जिसका सेंटर पाकिस्तान है। वहां से वैकल्पिक रास्तों बांग्लादेश और नेपाल बॉर्डर के जरिए भारत में दाखिल हो रहे हैं। दरअसल गिरफ्तार अली असगर ने बताया कि गैंग का सरगना आसिफ है, वह अंसारी के साथ मिलकर पाकिस्तान से नकली नोट मंगवाता है। नोट नेपाल और बांग्लादेश बॉर्डर से भारत आते हैं। आसिफ फिलहाल फरार है, उसे स्पेशल सेल पहले भी दो बार गिरफ्तार कर चुकी है। इसके खिलाफ स्पेशल सेल के दो और संसद मार्ग थाने में एक मामला दर्ज हैं। राम प्रवेश पिछले तीन साल और अली असगर पिछले 19 सालों से नकली नोटों का धंधा कर रहे थे। राम प्रवेश शादीशुदा है और तीन बच्चे हैं। जबकि रक्सौल निवासी अली असगर भी शादीशुदा है और पांच बच्चे हैं। यह अपने काले कारनामों को छिपाने के लिए खेती और लोकल लेवल पर प्रॉपर्टी डीलिंग करता है।
नेपाल-बांग्लादेश बॉर्डर पर सक्रिय है सिंडिकेट
पुलिस के मुताबिक नकली नोटों का इंटरनेशनल सिंडिकेट ज्यादातर नेपाल या बांग्लादेश बॉर्डर पर सक्रिय है। बरामद नोट ऐसे हैं कि इन्हें आसानी से पहचान पाना मुश्किल होता है। आमतौर पर 1 लाख कीमत के नकली नोट 30 से 35 हजार में सप्लायर को बेच दिए जाते हैं। पुलिस अफसर की मानें तो पाकिस्तान के अंसारी का वहां छिपे दाऊद के सिंडिकेट से लिंक है। इसमें आईएसआई का सपोर्ट रहता है। बांग्लादेश और नेपाल के रास्ते पहुंच रहे 500 के हाई क्वॉलिटी नोट कराची की प्रिंटिंग प्रेस में छपाई होती है। अधिकारी के मुताबिक, सिंडिकेट इतना बड़ा है कि भारत की सीमा में प्रवेश करते ही नकली नोटों के खेप के लिए बोली लगती है। नकली नोटों के बड़े डीलर उसे खरीदते हैं, फिर छोटे छोटे सप्लायर की मदद से पूरे देश में पहुंचाते हैं। यह लोग सड़क के बजाय रेल रूट ज्यादा पसंद करते हैं। खासकर सुपरफास्ट ट्रेनें। एक तो गिनती के स्टेशनों पर रुकती हैं। कुछ मिनट के ठहराव में ट्रेनें चेक नहीं हो पाती है। इसके कैरियर बिहार, झारखंड, दिल्ली के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में भी सक्रिय हैं।




