दुबई में बैठे युवक पर आगरा पुलिस ने कर दी गुंडा ऐक्ट की कार्रवाई

आगरा,(उत्तर प्रदेश)। आगरा पुलिस ने अजीब कारनामा किया है। पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति के खिलाफ लोक शांतिभंग, 110 जी की कार्रवाई की है जो कि 2 महीने से दुबई में रह रहा है। जब पुलिस पीड़ित परिवार के घर नोटिस लेकर पहुंची तो वे सन्न रह गए। उन्होंने डीसीपी सिटी विकास कुमार को मामले से अवगत कराया है। उन्होंने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। मामला सदर क्षेत्र का है। हिमाचल कालोनी में रहने वाले गजेंद्र सिंह नरवार बीएसपी के नेता है। उन्होंने बताया कि उनका भाई शैलेंद्र सिंह उर्फ शैली जाट दो महीने पहले दुबई चला गया है। वहां रहकर एक प्राईवेट कंपनी में नौकरी कर रहा है। 24 मई को थाना सदर पुलिस उनके घर नोटिस लेकर पहुंची।
2019 में गोलीकांड में भी आया था नाम
पुलिस ने बताया कि शैलेंद्र सिंह को 110 जी में पाबंद कर दिया गया है। इसके आधार एसीपी छत्ता ने नोटिस जारी किया है। आपको एसीपी की कोर्ट में दो जमानतदार पेश करने होंगे। शैलेंद्र के भाई गजेंद्र सिंह नरवार ने बताया कि वर्ष 2019 में एक गोलीकांड हुआ था। जिसमें कालोनी के रहने वाले वाले अमर सिंह ने तीन लोगों को नामजद करवाया था। जिसमें अमर सिंह ने उनके भाई शैलेंद्र को नामजद किया था। जबकि शैलेंद्र उनदिनों हरियाणा भिवनी में जॉब करता था। इस मामले में धारा 307, एससीएसटी ऐक्ट के तहत केस दर्ज किया गया। विवेचना में उन्होंने अपने भाई के साक्ष्य प्रस्तुत किए थे। चार्जशीट में उनके भाई को क्लीन चिट दे दी गई थी। उसी केस के आधार पर पुलिस ने फिर से उसे 110G में पाबंद कर दिया है।
डीसीपी सिटी ने दिए जांच के आदेश
गजेंद्र सिंह ने बताया कि जब उन्हें पुलिस का नोटिस मिला तो वे कोर्ट से सर्टिफाइट कॉपी लेकर मंगलवार को पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे थे। वहां उन्होंने डीसीपी सिटी विकास कुमार को साक्ष्य दिखाए। जिस पर डीसीपी ने कहा है कि वे इस मामले की जांच खुद करेंगे कि दुबई में रहने वाले युवक के खिलाफ किस आधार पर 110 जी की कार्रवाई की गई।
छह महीने तक लगानी होती है हाजिरी
110 जी में पुलिस ने थाना क्षेत्र में रहने वाले अपराधिक प्रवृत्ति (गुंडा एक्ट) में पाबंद करने की आख्या एसीपी को भेजती है, जिससे लोक शांति को खतरा हो सकता है। गंडा एक्ट में पाबंद किए गए व्यक्ति को छह महीने तक थाने में हाजिरी लगानी पड़ती है। दो जमानतदार प्रस्तुत करने पड़ते हैं। इसे सदाचार प्रतिभूति भी कहा जाता है। इस दौरान किसी भी घटना में शामिल होने की जानकारी होते ही जमानत भी जब्त कर ली जाती है।

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