गोरखपुर में न नोटिस, न मुआवजा… सीधे घर गिराने पहुंच गई जीडीए की टीम

गोरखपुर,(उत्तर प्रदेश)। गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट कहे जाने वाले खोराबार टाउनशिप ऐंड मेडिसिटी योजना पर फिलहाल ग्रहण लगा हुआ है। मुआवजे को लेकर पिछले 3 मार्च से किसानों और जीडीए के बीच खींचातानी चल रही है, जिसका फिलहाल कोई हल निकलता दिखाई नहीं दे रहा है। पिछले 3 दिनों से जीडीए की टीम भूमि अधिकरण के लिए वहां पहुंचती है तो स्थानीय नागरिकों और किसानों का विरोध शुरू हो जाता है।
जीडीए और किसानों के बीच खींचतान
गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह जनपद है, जहां उन्होंने शहर वासियों को कई विकास योजनाएं दी हैं। इसी कड़ी में उनके ड्रीम प्रोजेक्ट कहे जाने वाले खोराबार टाउनशिप ऐंड मेडिसिटी योजना को लेकर जीडीए ने कार्य शुरू कर दिया है लेकिन प्रोजेक्ट पर काम शुरू होने के बाद से ही अब तक किसानों और जीडीए के बीच कोई समन्वय स्थापित नहीं हो पा रहा है। किसानों की लगातार मांग है कि जब तक मुआवजे की राशि तय नहीं होगी, तब तक हम काम शुरू नहीं होने देंगे।
इसको लेकर पिछले 3 माह से किसान और जीडीए के बीच खींचतान चल रही है। किसानों और स्थानीय लोग जिन्होंने यहां जमीन खरीद कर अपने मकान बनाए हैं, ऐसे लोगों का विरोध लगातार जारी है। इन लोगों ने मुआवजे की राशि और अनधिकृत रूप से मकानों के गिराए जाने को लेकर विरोध किया पर कुछ हासिल होता न देख प्रशासनिक अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। बावजूद इसके सोमवार को जीडीए की टीम बुलडोजर के साथ खोराबार पहुंच गई जहां उन्हें किसानों और स्थानीय नागरिकों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा।
बुधवार को फिर से जीडीए की टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची थी लेकिन दर्जनों की संख्या में स्थानीय महिलाएं बुलडोजर के सामने लेट गईं और वापस जाओ के नारे लगाते हुए जमकर विरोध किया। अंततः एक बार फिर से टीम को वापस लौटना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि 15-20 साल से हम लोग यहां मकान बनाकर रह रहे हैं। बगैर किसी नोटिस या सूचना के जीडीए हमारे मकानों पर बुलडोजर चला रही है। गाढ़ी कमाई से बनाए गए आशियाने को इस तरह ढहाने का किसी को कोई अधिकार नहीं। न तो हमें कोई लीगल नोटिस दी गई और न ही कोई मुआवजे की राशि तय हुई।
क्या कहते हैं स्थानीय नागरिक और किसान
स्थानीय नागरिक का कहना है कि हमने अपनी गाढ़ी कमाई से थोड़ा थोड़ा रुपए इकट्ठा कर जमीन खरीदी और उस पर मकान बनाया था। आज जीडीए बगैर किसी नोटिस के हमारा मकान ढहाने आ रही है जो की पूरी तरह मनमाना और तानाशाही रवैया है। लोग लगातार प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं लेकिन हमारी कोई सुनने वाला नहीं। हम मुख्यमंत्री जी से अपील करते हैं कि हमें न्याय मिलना चाहिए नहीं तो हम लोग जान दे देंगे पर जीडीए को जमीन अधिग्रहण करने नहीं देंगे।
काश्तकार रामप्रीत पासवान का कहना है कि सरकार जिस रेट पर मुआवजा मुहैया कराने की बात कर रही है वह बहुत पुराना है। हम चाहते हैं कि वर्तमान में जो सर्किल रेट चल रहा है उसके आधार पर 4 गुना मुआवजा दिया जाए। तभी हम अपनी जमीन विकास प्राधिकरण को देंगे, अन्यथा विरोध जारी रहेगा।
गोरखपुर विकास प्राधिकरण के मुख्य अभियंता किशन सिंह का कहना है कि फिलहाल वही मकान ढहाए जा रहे हैं जो खाली है और उनमें ताला लगा हुआ है। जब उनसे पूछा गया कि क्या जिस मकान में ताला लगा रहेगा या कोई नहीं रह रहा होगा तो उसको ढहा दिया जाएगा यह तो कहीं से भी न्याय संगत नहीं है तो उनका कहना था कि नहीं ऐसा नहीं है जिन मकानों को चिन्हित किया गया है। जहां वर्षों से कोई नहीं रहा है उन्हीं को ढहाया जाएगा और ऐसे लोगों को बहुत सस्ते दर पर इसी योजना के तहत प्राधिकरण मकान मुहैया कराएगा।वहीं किसानों के मुआवजे को लेकर उन्होंने कहा कि बातचीत चल रही है, जो रेट तय किया गया है उसी आधार पर उन्हें मुआवजा मिलेगा। हालांकि किसान अपने हिसाब से रेट बता कर उसके चार गुना मुआवजे की मांग रहे हैं।
क्या है योजना
आपको बता दें कि इस टाउनशिप योजना की आधारशिला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी साल 28 मार्च को रखी थी। आधारशिला रखे जाने के बाद से ही गोरखपुर विकास प्राधिकरण इस योजना को लेकर बेहद उत्साहित था। योजना के लिए 184.17 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। इसमें 109.25 एकड़ में टाउनशिप और 74.25 एकड़ भूमि में मेडिसिटी को बनाया जाना है।

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