आगरा विश्वविद्यालय के कुलसचिव समेत 4 के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज, छात्रा को दी थी फर्जी डिग्री

आगरा,(उत्तर प्रदेश)। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के अधिकारियों पर विश्वविद्यालय की छात्रा ने धोखाधड़ी करने के मामले में केस दर्ज कराया है। छात्रा ने 1990 में डिप्लोमा इन क्लीनिकल कैमिस्ट्री का कोर्स किया था। छात्रा का आरोप है कि विश्वविद्यालय से मिली डिग्री फर्जी है। कोर्ट के आदेश पर कुलसचिव समेत अन्य अधिकारियों पर केस दर्ज हुआ है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि मामला पुराना है अभी कुछ कह नहीं सकते हैं।

आवास विकास सेक्टर 10 सिकंदरा की रहने वाली नीलम कुलश्रेष्ठ का कहना है कि उन्होंने वर्ष 1990 में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पीजी डिप्लोमा इन क्लीनिकल कैमिस्ट्री किया था। इस डिप्लोमा के आधार पर उन्हें जिला अस्पताल में नौकरी मिल गई, लेकिन जब उनके दस्तावेजों की जांच हुई तो वह डिग्री फर्जी निकली है। नीलम कुलश्रेष्ठ ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह बताकर छात्रों को प्रवेश लिया था कि डिप्लोमा यूजीसी और सरकार से मान्यता प्राप्त है। मगर सचिव, स्टेट मेडिकल फैकल्टी लखनऊ से पता चला कि विश्वविद्यालय की मान्यता के लिए कोई प्रावधान नहीं है।
कुलसचिव, वित्ताधिकारी भी नामज
नीलम कुलश्रेष्ठ ने बताया कि वे जिला अस्पताल में नौकरी कर रही हैं, अस्पताल प्रशासन को उनकी डिग्री के बारे मेें पता चला है कि वे फर्जी डिग्री पर नौकरी कर रही हैं तो उन्हें लोग मानसिक तौर पर परेशान कर रहे हैं। इस संबंध में नीलम ने न्यायालय की शरण ली। कोर्ट के आधार पर थाना हरीपर्वत में कुलसचिव, वित्ताधिकारी, विभागाध्यक्ष रसायन विज्ञान और अंकतालिका जारी करने वाले अधिकारी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

इन धाराओं में दर्ज हुआ केस
नीलम कुलश्रेष्ठ ने बताया कि विश्वविद्यालय में 1989 से 91 तक डिप्लोमा इन क्लीनिकल कैमिस्ट्री में छात्रों ने विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों को गुमराह कर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। कूटरचित दस्तावेज तैयार कराने और फर्जीवाड़ा करने के मामले में धारा 420, 467, 468, 471, 120 बी के तहत केस दर्ज किया है।

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