गुजरात के गांधीनगर में हजारों दलित हिन्दुओं ने किया धर्मपरिवर्तन, बीजेपी ने बताया षड्यंत्र

  • गांधीनगर के रामकथा मैदान हजारों दलित हिन्दुओं ने किया धर्मपरिवर्तन
  • आंबेडकर जंयती के मौके पर हुए कार्यक्रम में बौद्ध धर्म किया स्वीकार
  • राजकोट के स्वयं सैनिक दल की तरफ आयोजित हुआ कार्यक्रम
  • बीजेपी अनुसूचित मोर्चा के अध्यक्ष ने आयोजकों पर साधा निशाना

गांधीनगर,(गुजरात)। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की 132वीं जयंती के मौके पर गुजरात के गांधीनगर में एक बड़ा धर्म परिवर्तन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में 10 हजार के करीब दलित हिन्दुओं ने बौद्ध धर्म को स्वीकार किया। कार्यक्रम में सभी ने बौद्ध भिक्षुओं की मौजूदगी में इसकी प्रतिज्ञा भी ग्रहण की। रामकथा मैदान पर आयोजित इस महा धर्म परिवर्तन कार्यक्रम क आयोजन स्वयं सैनिक दल नाम के संगठन की ओर से किया गया। दलित हिंदुओं के धर्म परिवर्तन करने के मुद्दे पर बीजेपी ने आयोजकों पर निशाना साधा है। गुजरात बीजेपी अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य ने कहा कि आयोजक गांधी जयंती के नाम पर लोगेां को बुलाते हैं और फिर एकदम से धर्म परिवर्तन का ऐलान कर देतें हैं। ऐसे में लोगों को कुछ समझ में नहीं आता है।

बीजेपी बोली, धर्म परिवर्तन साजिश

आर्य ने कहा कि कई सारे ऐसे दल हैं जो इस काम में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब बीजेपी की सरकारें सबका साथ और सबका विकास के ध्येय से काम कर रही हैं तो इस सब की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ी साजिश है। इसे कामयाब नहीं होने देंगे। गुजरात के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे आर्य ने कहा कि पीएम नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस समारोह के तहत छेड़े गए सेवा ही समर्पण अभियान के तहत अनुसूचित जाति के लोगों के सशक्त बनाया जाएगा और उन्हें सम्मान भी दिया जाएगा। पूर्व सांसद व मोर्चे के राष्ट्रीय महामंत्री शंभूनाथ टुंडिया ने सभी धर्म परितर्वन कराने वालों को आड़े हाथों लिया।

धर्म परिवर्तन से पहले निकाली रैली

रामकथा मैदान पर धर्म परिवर्तन कार्यक्रम से पहले स्वमं सैनिक दल ने एक रैली भी निकाली। यह रैली त्रिमंदिर से शुरू हुई। इसमें बड़ी संख्या में देश और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए अनुसूचित जाति के लोगों ने हिस्सा लिया। तो वहीं 100 से अधिक बसों से लोग रामकथा मैदान पर पहुंचे और फिर आंबेडरक जयंती के सेलिब्रेशन के साथ बौद्ध धर्म की दीक्षा ली।

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