हत्या कर मुठभेड़ का रूप देने के दोषी पांच पुलिसवालों को आजीवन कारावास

प्रेमप्रकाश त्रिपाठी,(गाजियाबाद ब्यूरो)। 16 साल पहले एटा में कारीगर राजाराम की हत्या कर मुठभेड़ का रूप देने के दोषी तत्कालीन थाना प्रभारी पवन सिंह समेत नौ पुलिसकर्मियों में से पांच को बुधवार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। पांचों हत्या में शामिल रहे थे। सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश प्रवेंद्र कुमार शर्मा ने 220 पेज के फैसले में पांचों पर 44-44 हजार का अर्थदंड लगाया है। बाकी चार ने झूठी सूचना दी थी और साक्ष्य मिटाए थे। उन्हें पांच-पांच साल कैद की सजा सुनाई गई है। उन्हें 11-11 हजार अर्थदंड देना होगा। कुल अर्थदंड की 50 फीसदी राशि राजाराम की पत्नी संतोष की दी जाएगी।
सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक अनुराग मोदी ने बताया कि सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ था कि एटा जिले के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के मिलावली गांव निवासी राजाराम को 18 अगस्त 2006 को शाम 7.45 बजे सुनहरा घुमरी रोड पर गोली मारकर हत्या कर दी। फर्जी मुठभेड़ की कहानी गढ़ते हुए उसके तीन साथी फरार बताए थे। राजाराम का शव परिजनों को देने के बजाय पुलिस ने अज्ञात बताकर अंतिम संस्कार कर दिया।जांच में खुलासा हुआ कि मजदूरी मांगने पर राजाराम का सिपाही राजेंद्र से झगड़ा हुआ था। राजेंद्र ने ही साजिश रची। पुलिस राजाराम को उसकी पत्नी और भाइयों के सामने उठाकर ले गई थी और नजदीक से गोली मारकर हत्या की। दोषियों में से अवधेश रावत, अजय कुमार और मोहकम सिंह को छोड़ सभी सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
सजा सुनाए जाने से पहले दोषी पुलिसकर्मियों ने खुद को बीमार बताते हुए रहम की अपील की। बलदेव और सुमेर सिंह की ओर से वकील ने कहा कि उनकी उम्र 65 से 70 के बीच है। गंभीर रूप से बीमार हैं। ठेनुआ की ओर से कहा गया कि वह 74 वर्ष का है और ब्लड प्रेशर व हार्निया का मरीज है। इसका बच्चा बीमार रहता है। सरनाम सिंह स्वयं बीमार है उसकी पत्नी कैंसर की मरीज है। पवन सिंह सेवानिवृत्त है और उसकी दो बेटियां और एक बेटा है। अवधेश रावत, अजय कुमार पुलिस सेवा में हैं, उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं। अवधेश की पत्नी का देहांत हो चुका है। मोहकम सिंह सेवानिवृत्त होने वाला है।
तत्कालीन थाना प्रभारी पवन सिंह, एसआई पाल सिंह ठेनुआ, सिपाही सरनाम सिंह, सिपाही राजेंद्र प्रसाद और जीप चालक मोहकम सिंह को मिली उम्रकैद एवं सिपाही बलदेव प्रसाद, सिपाही अजय कुमार, सिपाही अवधेश रावत और सिपाही सुमेर सिंह को पांच साल की सजा।




