लाश की राख से गेंद बनाकर होता था खेल, हारने वाले को मिलती थी मौत! जानें माया सभ्यता के भयानक बॉलगेम की कहानी

  • माया सभ्यता में खेला जाता था भयानक बॉलगेम, हिंसक खेल के मैदान मिले
  • रबर की बॉल से होता था खेल, चोटों से बचने के लिए पहने जाते थे सुरक्षा कवच
  • शासकों की राख से बनाई गई बॉल से होता था गेम, पुरातत्वविदों ने लगाया अनुमान

मैक्सिको सिटी। इतिहास में खेले जाने वाले एक भयानक खेल के बारे में जानकर कुछ शोधकर्ता हैरान हो गए। माया सभ्यता में खेले जाने वाले अजीबोगरीब बॉलगेम में मरे हुए लोगों की राख से बनाई जाने वाली गेंदों का इस्तेमाल किया जाता था। शोधकर्ताओं ने इसे ‘बॉलगेम’ नाम दिया है। माना जाता है कि यह माया सभ्यता के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं में से एक था। इस खेल के नियम ज्ञात नहीं हैं लेकिन जानकारों का मानना है कि यह खेल दो विरोधी टीमों के बीच एक ‘I’ आकार के मैदान पर एक रबर बॉल के साथ खेला जाता था। डेली बीस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक यह एक हिंसक खेल था।

डेलीस्टार की रिपोर्ट के अनुसार, चोट से बचने के लिए खिलाड़ी सुरक्षा कवच पहनते थे क्योंकि यह खेल पत्थर की दीवारों के बीच खेला जाता था। कुछ लोगों का तो यहां तक मानना है कि खेल में हारने वालों की आखिर में बलि दे दी जाती थी लेकिन ज्यादातर शोधकर्ता इसे खेल का हिस्सा नहीं मानते हैं। इसके बजाय संभावना है कि खेल के दौरान मारे जाने वाले लोग हिंसक बॉलगेम का शिकार होकर मारे जाते थे। प्राचीन माया शहरों में इस खेल के कई मैदान खोजे गए हैं। यह खेल आज के एरिजोना और न्यू मैक्सिको से लेकर सुदूर दक्षिण कोलंबिया तक खेला जाता था।
तहखाने में मिले 400 जहाज
खेल के बारे में एक खौफनाक खोज से जानकारों को पता चला कि यह बॉलगेम उनकी सोच से कहीं ज्यादा ‘भयानक’ था। साल 2020 में मैक्सिको के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एंथ्रोपोलॉजी एंड हिस्ट्री के पुरातत्वविद जुआन यदुन एंगुलो के नेतृत्व में एक टीम ने मैक्सिको के चियापास के टोनिना में एक पिरामिड के नीचे 1000 साल से अधिक पुराने तहखाने की खोज की। तहखाने के भीतर पुरातत्वविदों को कई सीढ़ियां और छोटे चेम्बर मिले। यहां टीम को करीब 400 जहाज मिले जिन पर कभी चारकोल, राख, लकड़ियां और प्राकृतिक रबर जैसा सामान रखा हुआ था।
लाशों की राख से बनाई जाती थी रबर बॉल
एंगुलो और उनके साथियों ने पाया कि वहां रखी सामग्री रबर के वल्केनाइजेशन या रबर को सख्त बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के समान थी। उन्होंने अनुमान लगाया कि राख दरअसल सभ्यता के शासकों के अवशेष थे, जिनका अंतिम संस्कार किया गय था। एंगुलो का मानना है कि प्राचीन शासकों को पहले राख में बदला जाता था और फिर उसे रबर की गेंदों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली एक सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। इस प्रक्रिया से शासकों का शरीर परिवर्तित होकर ‘बॉल के रूप’ में अमर हो गया। कुछ जानकार एंगुलो की थ्योरी को सच नहीं मानते और अधिक रिसर्च की मांग करते हैं।

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