सात फेरे लेने के बाद दुल्हन की बैलगाड़ी से हुई विदाई, अनोखी शादी देखने को उमड़ा पूरा गांव

हमीरपुर/उत्तर प्रदेश। हमीरपुर जिले में आधुनिकता के दौर में भी ऐसी शादी हुई जिसमें धनकुबेर पिता ने अपनी बेटी की विदाई बैलगाड़ी से कर गौवंश के संरक्षण के लिए बड़ा संदेश दिया है। बैलगाड़ी से दुल्हन की विदाई देखने के लिए पूरा गांव उमड़ा। हर कोई इस शादी को देख दंग रह गया। हमीरपुर जिले के राठ कस्बे में अनोखी शादी हुई। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रीतम सिंह किसान की गिनती धनकुबेरों में होती है। ये एक बार लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके है। इनकी बेटी रुचि सिंह राजपूत इंडीनियर डिजायनर है। इसकी शादी राठ नगर के पठानपुरा मुहाल निवासी डॉ कनिष्क माहुर के साथ तय की थी।
पिछले दिनों बारात भाजपा नेता के दरवाजे पहुंची जहां बरातियों का जमकर स्वागत सत्कार किया गया। शादी के मंडप में दुल्हन ने सात फेरे लिए। शादी की रस्में पूरी होने के बाद दहेज के तौर पर दाल भात दूल्हे के परिजनों को दिया गया।
अगले दिन दुल्हन की विदाई का समय आया तो पिता ने अपनी बेटी की विदाई बैलगाड़ी से करने का फैसला लिया। आनन-फानन बैलगाड़ी का इंतजाम कराया गया। बैलगाड़ी को भी फूलों और रंग बिरंगी झालरों से सजाया गया।
बैलों को भी रंग बिरंगे परिधान में सजाया गया। विदाई की बेला आते ही दुल्हन को बैलगाड़ी में बैठाकर विदा किया गया। बैलगाड़ी से दुल्हन और दूल्हे की विदाई देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों का मेला लगा। दुल्हन बैलगाड़ी से करीब दो किमी तक सफर तय कर ससुराल पहुंची जहां उसका स्वागत किया गया। ससुराल वाले भी बैलगाड़ी से दुल्हन की विदाई देख खुशी से झूम उठे।
दुल्हन के पिता प्रीतम सिंह किसान ने बताया कि बैलगाड़ी किसानों का महत्वपूर्ण साधन रही है। लेकिन इसे आधुनिकता के दौर में आज भुला दिया है। बताया कि सभी लोग डोली की जगह बैलगाड़ी से अपनी बेटी की विदाई करेंगे तो किसानों को भी अतिरिक्ति आमदनी होगी। वहीं गौवंश के संरक्षण को सभी बल मिलेगा। बताया कि बैलगाड़ी की जगह लग्जरी कारों से दुल्हन की वि दाई किए जाने का दौर जब से शुरू हुआ है तभी से गौवंश आज इधर उधर घूम रहा है।

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