रिटायर फौजी ने सोशल मीडिया पर जीता लोगों का दिल, लाखों रुपये का लालच छोड़ दिखाई इमानदारी
Retired soldier won the hearts of people on social media, showed honesty by leaving the greed of lakhs of rupees

झुंझुनूं/राजस्थान। बढ़ते भ्रष्टाचार और लालच के इस दौर में ईमानदारी की मिसालें कम ही देखने को मिलती हैं। लेकिन झुंझुनूं जिले के नवलगढ़-उदयपुरवाटी क्षेत्र में एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने यह साबित कर दिया कि ईमानदारी अब भी जिंदा है। एक सेवानिवृत्त फौजी और उसके साथी ने लाखों रुपये के गहनों और नकदी से भरा लावारिस बैग उसके असली मालिक तक पहुंचाकर मिसाल कायम की है।बैग में सोने-चांदी के आभूषण और नकदी थी, लेकिन उसमें ऐसी कोई पहचान संबंधी चीज़ नहीं मिली, जिससे उसके मालिक का पता लगाया जा सके। बावजूद इसके, सेवानिवृत्त फौजी और उसके दोस्त ने बैग को अपने पास रखने के बजाय उसके असली हकदार तक पहुंचाने की ठानी। उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया, जिससे बैग के असली मालिक का पता लग गया। जब नवविवाहित दंपति को उनका बैग वापस मिला, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वे इसे लौटाने वालों को बार-बार धन्यवाद देते दिखे।
दरअसल, झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ के नवलड़ी गांव निवासी सेवानिवृत्त फौजी राजेंद्र सिंह रंणवा और उनके साथी सुनील झाझड़िया, जो भडूंदा खुर्द-झुंझुनूं के निवासी हैं, हाल ही में सीकर जिले के जीणमाता क्षेत्र में स्थित हर्षनाथ मंदिर गए थे। वहीं, उन्हें मंदिर परिसर में एक महिला का लावारिस हैंडबैग मिला। बैग खोलकर देखने पर उसमें सोने की चेन, पांच अंगूठियां, एक घड़ी, पायल, चांदी की बिछिया, सात हजार रुपये नकद, एक महिला पर्स और मेकअप का सामान मिला, जिसकी कुल कीमत दो लाख रुपये से अधिक थी।
बैग में ऐसा कुछ नहीं था, जिससे आसानी से उसके मालिक की पहचान की जा सके। लेकिन राजेंद्र सिंह और सुनील ने ईमानदारी दिखाते हुए सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा की। इसके बाद पता चला कि यह बैग उदयपुरवाटी क्षेत्र के नवविवाहित दंपति सुलोचना सैनी और अंकित सैनी का था, जो मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए आए थे और अनजाने में अपना बैग वहीं भूल गए थे।
जब बैग के असली मालिक का पता चला, तो दोनों युवकों ने बिना किसी देरी के उसे वापस लौटाने का फैसला किया। बैग पाकर नवविवाहित जोड़े की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने राजेंद्र सिंह और सुनील झाझड़िया की ईमानदारी की जमकर सराहना की और बार-बार उन्हें धन्यवाद दिया। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि ईमानदारी आज भी समाज में मौजूद है और दूसरों के लिए प्रेरणा बनने का काम कर रही है।




