तीन दिन से नहीं मिला खाना, भूख बर्दाश्त न होने पर दारोगा से लिपटकर रोने लगा सात साल का बच्चा

मिर्जापुर/उत्तर प्रदेश। पिता के निधन के बाद नन्हें कंधों पर मां के इलाज का बोझ था। मां बीमार थी और तीन दिन से खाना नहीं मिल रहा था। जब नन्हें बच्चे से भूख बर्दाश्त नहीं हुई तो भागकर पुलिस चौकी पहुंच गया। पुलिस चौकी पर पहुंचा नन्हा बालक दारोगा से लिपटकर रोने लगा। दारोगा ने पहले नन्हें बालक को शांत कराया और रोने की वजह पूछी तो बच्चे ने बताया कि मेरी मां बीमार है। तीन दिन से कुछ नहीं खाया हूं। दारोगा ने पहले शांत कराया और बच्चे की मदद की। नेक दिल दारोगा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और यूपी पुलिस की जमकर तारीफ हो रही है।
भूख से व्याकुल बालक पहुंचा दारोगा के पास
मिर्जापुर जिले के चुनार तहसील क्षेत्र के पटिहटा गांव का रहने वाला सात वर्षीय बालक सुदामा तीन दिनों से भूखा था। भूख से परेशान बालक 29 नवम्बर की सुबह इमिलियाचट्टी पुलिस चौकी पर पहुंचा। पुलिस चौकी पर पहुंचा बालक पुलिसकर्मियों को देखकर रोने लगा। चौकी प्रभारी दिलीप कुमार गुप्ता जब बच्चे के पास पहुंचे तो उनसे भी लिपटकर रोने लगा। दारोगा ने पहले बच्चे को शांत कराया और रोने का कारण पूछा। कारण पूछने पर सुदामा ने बताया कि उसकी मां कई दिनों से बीमार है। पिछले तीन दिनों से मैं और मेरी मां ने कुछ खाया नहीं है। भूख से व्याकुल होकर दारोगा के पहुंचे बच्चे को पहले दारोगा ने समोसा खिलाया और घर पर पहुंचकर मदद की।
पटिहटा के रहने वाले बालक सुदामा के पिता का तीन साल पहले निधन हो चुका है। दोनों के रहने के लिए घर भी नहीं है। काली मंदिर के एक कमरे में दोनों रहते हैं। बालक सुदामा की मां पिछले कुछ दिनों से मानसिक रूप से बीमार रहती है। मां के इलाज का बोझ कंधे पर लेकर बालक आसपास के लोगों से मदद मांगता था और इलाज कराता था। पिछले तीन दिनों से उसके पास खाने के लिए कुछ नहीं था। बीमार मां भी तीन दिन से भूखी थी। बालक से जब भूख बर्दाश्त नहीं हुई तो बालक पुलिस चौकी पर पहुंचकर रोने लगा था। सुदामा के परिवार आज भी सरकार की योजनाओं से वंचित है।
दारोगा दिलीप कुमार गुप्ता ने बताया कि एक बच्चा सुबह मेरे पास आया हुआ था। मेरे पास आकर बच्चा रोने लगा। मैंने उसे शांत कराया और पूछा तो बताया कि तीन दिनों से भूखा है। मैंने बच्चे को कुछ खाने के लिए मंगाया, तब तक उसकी मां भी आ गई। बच्चे ने पहले मां को खिलाया फिर खुद खाया। मैं बच्चे के साथ उसके घर पर गया और मदद की। मैंने ग्राम प्रधान से भी बातचीत की। ग्राम प्रधान ने जल्द अंत्योदय कार्ड बनवाने और आवास का लाभ देने की बात कही है। बच्चे को अब आगे दिक्कत नहीं होगी।

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