राजस्थान के थानों में अब नहीं चलेगी ‘थर्ड डिग्री’, पुलिस मुख्यालय ने खींची लक्ष्मण रेखा

राजस्थान में पिछले दो सालों में पुलिस हिरासत में हुई 21 मौतों के बाद पुलिस मुख्यालय सख्त हो गया है। एडीजी डॉ. हवासिंह घुमरिया ने नई गाइडलाइन जारी कर थानों की जवाबदेही तय की है। अब गिरफ्तारी के बाद अनिवार्य मेडिकल जांच, पूछताछ की निगरानी और लॉकअप का नियमित निरीक्षण होगा।

जयपुर/एजेंसी। क्या पुलिस के लॉकअप अब सुरक्षित होंगे? क्या अब किसी आरोपी को थाने ले जाने के बाद उसके परिवार को उसकी जान का डर नहीं सताएगा? राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने इन सवालों के जवाब में एक ऐसा सख्त कदम उठाया है, जो सीधे तौर पर आम जनता के मानवाधिकारों की ढाल बनेगा। प्रदेश में पिछले दो सालों में हिरासत में हुई 21 मौतों ने खाकी की छवि पर जो दाग लगाए थे, उन्हें धोने के लिए अब एडीजी हवासिंह घुमरिया ने नई ‘कठोर’ गाइडलाइन जारी की है।
आंकड़े डराने वाले हैं। जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 के बीच प्रदेश के अलग-अलग थानों में 21 लोगों की जान चली गई। पुलिस हिरासत में होने वाली इन मौतों और प्रताड़ना की खबरों ने जनता के बीच अविश्वास की खाई पैदा कर दी थी। इसी को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने अब थानों की मनमानी पर लगाम कस दी है। नई गाइडलाइन का साफ संदेश है कि गिरफ्तारी का मतलब प्रताड़ना नहीं है।
आम आदमी के लिए यह खबर राहत भरी है। अक्सर छोटे-मोटे अपराधों में पकड़े गए लोग पुलिस के खौफ से कांपते थे। इस नई गाइडलाइन से पुलिस की जवाबदेही तय होगी। अब पुलिस को हर छोटी-बड़ी कार्रवाई का लिखित और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा, जिसे मिटाया नहीं जा सकेगा। अतिरिक्त महानिदेशक हवासिंह घुमरिया की ओर से जारी यह सर्कुलर केवल कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि पुलिसिंग को ‘कम्युनिटी फ्रेंडली’ बनाने की कोशिश है। पुलिस का काम अपराधी को सजा दिलाना है, उसे प्रताड़ित करना नहीं।

नई गाइडलाइन: अब ‘साहब’ की होगी सीधी जिम्मेदारी

अब तक पुलिस हिरासत में मौत होने पर अक्सर ‘बीमारी’ या ‘आत्महत्या’ का बहाना बनाकर मामला टाल दिया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नए नियमों के अनुसार-

  • मेडिकल जांच अनिवार्य: किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेते ही सबसे पहले उसका मेडिकल चेकअप कराना होगा।
  • निगरानी में पूछताछ: अब पुलिस थानों के अंधेरे कमरों में ‘थर्ड डिग्री’ देना मुमकिन नहीं होगा। पूछताछ की पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी।
  • लॉकअप की रैंडम चेकिंग: उच्च अधिकारी अचानक थानों के लॉकअप की जांच करेंगे कि वहां बंद व्यक्ति किस हाल में है।
  • जिम्मेदारी तय: यदि हिरासत में किसी की सुरक्षा या स्वास्थ्य बिगड़ता है, तो इसके लिए संबंधित थाना अधिकारी और जांच अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे।

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