150 की रिश्वत लेने के 25 साल पुराने मामले में महिला सिपाही की दोषसिद्धी बरकरार, दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका

नई दिल्ली। गैर-संज्ञेय अपराध (एनसीआर) दर्ज करने के लिए 200 रुपये की रिश्वत लेने के 25 साल पुराने मामले में महिला सिपाही की दोषसिद्धी को दिल्ली हाई कोर्ट ने बरकरार रखा है। अनिल क्षेत्रपाल व न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ कहा कि मामले में रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य अपीलकर्ता को दोषी सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है।
अदालत ने कहा कि अनुशासनात्मक कार्रवाई के मामले में जब किसी पुलिसकर्मी को अपनी ड्यूटी के दौरान पैसे लेते हुए रिकॉर्ड किया जाता है तो आवाज की जांच न होना या अलग से बरामदगी न होना विजुअल रिकॉर्डिंग के साक्ष्य वाले तथ्य को खत्म नहीं करता है।
अनुशासनात्मक प्राधिकारी, अपील प्राधिकारी और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के निष्कर्षों को गलत या मनमाना नहीं कहा जा सकता। अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता महिला सिपाही को दोषी करार देने के निर्णय में कोई गलती नहीं है और अपील याचिका खारिज की जाती है।
याचिका के अनुसार, महिला सिपाही पर आरोप है कि छह सितंबर 2005 में एनसीआर दर्ज करने के लिए उसने एक व्यक्ति से 200 रुपये मांगे थे और 150 रुपये लिए थे। यह पूरी वारदात मीडिया के एक स्टिंग ऑपरेशन में रिकॉर्ड हुई थी।
इसके बाद विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई में महिलाकर्मी को बर्खास्त करने का आदेश दिया गया था। महिला ने उक्त निर्णय के खिलाफ कैट का रुख किया और कैट ने विभागीय कार्रवाई काे बरकरार रखा। कैट के निर्णय को महिला कर्मी ने हाई कोर्ट में 2009 में चुनौती दी थी।




