पति ने छीना बेटा और घर, मेरठ में दर-दर भटक रही बेसहारा मां, सीएम योगी से इंसाफ की गुहार
Husband snatched away son and house, helpless mother is wandering from door to door in Meerut, pleading for justice from CM Yogi

मेरठ/उत्तर प्रदेश। मेरठ में एक मां का दर्द सड़कों पर बैनर बनकर चीख रहा है। मेरठ की छाया इंसाफ की उम्मीद में दर-दर भटक रही है, और उसका एकमात्र सवाल है, “क्या मां होना गुनाह है?” मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और स्थानीय प्रशासन से न्याय की गुहार लगाती छाया की कहानी दिल दहलाने वाली है।
छाया की शादी 12 दिसंबर 2013 को मोहित अरोड़ा, पुत्र स्व. राम अवतार, निवासी ए-94, सरस्वती लोक, थाना ब्रह्मपुरी, मेरठ से हुई थी। 11 साल तक वह अपने पति और ससुराल वालों के साथ इसी पते पर रही। इस दौरान उनके बेटे मंत्र का जन्म हुआ, जो अब 10 साल का है। छाया का आरोप है कि पति ने फर्जी दिल्ली का पता देकर मेरठ के परिवार न्यायालय से 20 नवंबर 2024 को एकतरफा तलाक का आदेश हासिल कर लिया। इसके बाद, 29 नवंबर 2024 को ससुराल वालों ने मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया और उसके बेटे को भी छीन लिया।
जब छाया पुलिस के साथ ससुराल वापस पहुंची, तो पति ने उसे घर में घुसने नहीं दिया। पुलिस ने कहा कि पहले तलाक का आदेश रद्द करवाओ। छाया ने हार नहीं मानी और अदालत में तलाक के आदेश को चुनौती दी। आखिरकार, 11 जुलाई 2025 को मेरठ के प्रधान परिवार न्यायालय ने तलाक का आदेश रद्द कर दिया, जिससे कानूनी तौर पर छाया और मोहित अब भी पति-पत्नी हैं। लेकिन इसके बावजूद छाया को न तो अपने वैवाहिक घर में प्रवेश मिल रहा है, न ही अपने बेटे मंत्र से मिलने का हक।
छाया का कहना है कि उसकी संपत्ति, कपड़े, पहचान पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज आज भी ससुराल में बंद हैं। 28 जुलाई 2025 को वह थाना ब्रह्मपुरी पुलिस के साथ फिर ससुराल गई, लेकिन एक बार फिर खाली हाथ लौटना पड़ा। अब उसके पास न तो पहनने को कपड़े हैं, न ही सिर छिपाने को छत। कभी बहन के घर, तो कभी पिता के घर शरण लेने को मजबूर छाया बस अपने बेटे और अपने हक की लड़ाई लड़ रही है।
छाया ने प्रशासन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है कि उसे उसके वैवाहिक घर में रहने की अनुमति दी जाए और बेटे मंत्र से मिलने का अधिकार सुनिश्चित किया जाए। उसका कहना है कि वह सिर्फ अपने हक और अपने बच्चे के लिए लड़ रही है।




