युद्ध संकट में निर्यातकों के लिए 500 करोड़ की रिलीफ स्कीम, आगे मिलेगी और भी राहत

नई दिल्ली/एजेंसी। ईरान युद्ध की वजह से पश्चिम एशिया देश में निर्यात की बढ़ती लागत को देखते हुए सरकार निर्यातकों के लिए 497 करोड़ रुपए की रिलीफ (रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन) स्कीम लेकर आई है। गुरुवार को वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से घोषित इस स्कीम के तहत निर्यातकों को इंश्योरेंस के खर्च में बड़ी राहत मिलेगी। युद्ध की वजह से निर्यात होने वाले आइटम की इंश्योरेंस लागत काफी बढ़ गई है। एमएसएमई श्रेणी के निर्यातक बढ़ती इंश्योरेंस लागत को देखते हुए निर्यात करने में हिचकिचाने लगे हैं। इसलिए एमएसएमई के प्रति निर्यातक सरकार उनके इंश्योरेंस के लिए 50 लाख रुपए तक का मदद देगी। अगले पांच साल के लिए चल रहे 25,000 करोड़ रुपए के एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत निर्यातकों को यह मदद दी जा रही है। तेल के निर्यात और जो जहाज माल लेकर लौट आए हैं, उन्हें रिलीफ स्कीम के दायरे से बाहर रखा गया है।
मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि निर्यातकों के लिए अभी बैंकिंग व वित्त से जुड़ी राहत के लिए भी स्कीम लाई जाएगी। दैनिक जागरण ने राहत पैकेज की जानकारी पहले ही दी थी। वाणिज्य मंत्रालय की घोषणा के मुताबिक यूएई, सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान, बहरीन, इराक, ईरान, इजरायल व यमन जैसे देशों में होने वाले निर्यात को रिलीफ स्कीम का लाभ मिलेगा। पश्चिम एशिया देशों में भारत 65 अरब डालर का निर्यात करता है। रिलीफ स्कीम को तीन भाग में बांटा गया है। पहले भाग के तहत 14 फरवरी से लेकर 15 मार्च तक होने वाले निर्यात को 100 प्रतिशत इंश्योरेंस का लाभ दिया जाएगा। एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कारपोरेशन ऑफ इंडिया (ईसीजीसी) से निर्यात होने वाले आइटम का इंश्योरेंस होता है। लेकिन निर्यात होने वाले वस्तुओं का 100 प्रतिशत कवर नहीं होता है।
अतिरिक्त शुल्क का होगा भुगतान
अमूमन निर्यातक 75 प्रतिशत तक कवर लेते हैं। अभी युद्ध की वजह से इस प्रकार के इंश्योरेंस का प्रीमियम भी काफी बढ़ गया है। इसलिए निर्यातक इससे भी कम का कवरेज ले रहे हैं। रिलीफ स्कीम के तहत इन आइटम को 100 प्रतिशत इंश्योरेंस मिलेगा और बाकी के कवरेज के लिए अतिरिक्त शुल्क का भुगतान सरकार करेगी। इस मद में 56 करोड़ का आवंटन किया गया है।रिलीफ स्कीम के दूसरे भाग के तहत 16 मार्च, 2026 से 15 जून, 2026 के बीच होने वाले निर्यात को 95 प्रतिशत इंश्योरेंस का कवरेज मिलेगा। इस अवधि में निर्यातकों को सरकार की वित्तीय मदद से अपने सामान के 95 प्रतिशत कवरेज लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस मद में 159 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है।
तीसरे भाग के तहत उन एमएसएमई निर्यातकों को राहत दी जाएगी जिन्होंने 14 फरवरी से 15 मार्च के बीच निर्यात किया है, लेकिन बढ़ी हुई लागत के कारण इंश्योरेंस नहीं लिया है। इन निर्यातकों के निर्यात आइटम का 50 प्रतिशत तक या इससे भी अधिक का इंश्योरेंस कवरेज का प्रीमियम सरकार देगी। लेकिन एक निर्यातक को अधिकतम 50 लाख रुपए तक की ही सहायता दी जाएगी।
इस मद में 282 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि युद्ध की वजह से व्यापार के लिए असाधारण स्थिति पैदा हो गई है। बहुत सारे एमएसएमई निर्यातकों ने लागत की वजह से इंश्योरेंस नहीं लिया है। उन्होंने बताया कि निर्यात के प्रभावित होने पर देश में रोजगार पर भी असर पड़ेगा और सरकार इस प्रभाव को कम करना चाहती है।




