दिल्ली में बनाए जा रहे थे फर्जी सर्टिफिकेट, क्राइम ब्रांच ने तहसीलदार सहित 4 को पकड़ा

नई दिल्ली। दिल्ली कैंट स्थित रेवेन्यू डिपार्टमेंट में बतौर एग्जीक्यूटिव मैजिस्ट्रेट कार्यरत एक अधिकारी की मिलीभगत से हो रही बड़ी जालसाजी का पर्दाफाश हुआ है। दरअसल कर्मचारी की मदद से जाली एससी, एसटी और ओबीसी सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे थे। पकड़े गए आरोपियों में मैजिस्ट्रेट नरेंद्र पाल सिंह, सौरभ गुप्ता, चेतन यादव और वारिस अली शामिल हैं। इनके पास से सैकड़ों जाली सर्टिफिकेट भी बरामद किए गए हैं। वहीं इस अवधि के दौरान विभाग की ओर से जारी किए गए 111 कास्ट सर्टिफिकेट की जांच करवाई जा रही है कि उनमें कौन सा असली है और कौन सा फर्जी है।
डीसीपी क्राइम ब्रांच राकेश पावरिया ने बताया कि क्राइम ब्रांच की सेंट्रल रेंज टीम को सूचना मिली थी कि एक गैंग लोगों को जाली कास्ट सर्टिफिकेट बनाकर दे रहा है। जिसके बाद टीम ने 13 मार्च को एक फर्जी आवेदक को जो सामान्य श्रेणी का था, उसे ओबीसी सर्टिफिकेट बनवाने के लिए संदिग्ध के पास भेजा था। उसे 3500 रुपये के बदले में रेवेन्यू डिपार्टमेंट से सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। उस सर्टिफिकेट को डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर भी अपलोड किया गया था। इसी तरह 20 मार्च को एक और फर्जी आवेदक का ओबीसी सर्टिफिकेट बना दिया गया और उससे 3 हजार रुपये लिए गए। आरोपी ने दोनों से ऑनलाइन पेमेंट ली थी। उसके अकाउंट की डिटेल्स निकालकर 9 मई को पुलिस टीम ने संगम विहार में रेड करके सौरभ को गिरफ्तार कर लिया। उसके फोन से पुलिस को काफी सबूत मिले।
पूछताछ में उसने खुलासा किया कि मैजिस्ट्रेट ऑफिस से नकली सर्टिफिकेट जारी किए गए थे। मामले में धोखाधड़ी समेत संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके बाद मैजिस्ट्रेट ऑफिस में कार्यरत चेतन, फिर मैजिस्ट्रेट के ड्राइवर वारिस और आखिर में मैजिस्ट्रेट को गिरफ्तार कर लिया गया। सौरभ ने खुलासा किया कि इसी साल वह जनवरी में वह चेतन के संपर्क में आया था। इन दोनों ने मैजिस्ट्रेट के ड्राइवर वारिस के जरिए मैजिस्ट्रेट से संपर्क कर जाली कास्ट सर्टिफिकेट जारी कर पैसा कमाने की योजना बनाई। आरोपी खुद उम्मीदवार की ओर से प्रमाण पत्र जारी करने के लिए आवेदन करते थे। काम होने के बाद आवेदक से मिला पैसा आपस में बांट लेते थे।
जांच में पुलिस को पता चला है कि आरोपी नरेंद्र पाल सिंह को 1991 में सीजी केस में बतौर एलडीसी नियुक्त किया गया था। मार्च, 2023 में उसे प्रमोशन देकर एग्जीक्यूटिव मैजिस्ट्रेट, दिल्ली कैंट, रेवेन्यू डिपार्टमेंट, दिल्ली सरकार के रूप में तैनात किया गया था। सौरभ गुप्ता संगम विहार का रहने वाला है। वह 10वीं तक पढ़ा है। वह पहले सब्जी बेचने का काम करता था। चेतन यादव सपरिवार बागडौला, दिल्ली का रहने वाला है। वह एक आउटसोर्स कर्मचारी है और दिल्ली कैंट कार्यालय में दिल्ली सरकार की हेल्प लाइन नंबर 1076 पर ड्यूटी करता है। आरोपी वारिस अली मंडोली एक्सटेंशन का रहने वाला है। 2017 से मार्च 2023 की अवधि के दौरान उसने सीपीडब्ल्यूडी कार्यालय में डाटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में काम किया। फिर वो दिल्ली कैंट के तहसीलदार नरेंद्र के संपर्क में आया। उसने इसे प्राइवेट ड्राइवर के तौर पर अपने साथ जोड़ लिया।
नरेंद्र के पास से उसका मोबाइल, वारिस के पास से एक लैपटॉप व एक मोबाइल, सौरभ गुप्ता के पास से 5 हार्ड ड्राइवर डिस्क और 2 स्लाइड स्टेट ड्राइव, पंपलेट और मोबाइल फोन। चेतन के पास से 2 हार्ड ड्राइवर डिस्क, 2 स्लाइड स्टेट ड्राइव, एक डिजिटल सिग्नेचर और सैकड़ों कास्ट सर्टिफिकेट बरामद कि गए हैं।

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