ढोंगी बाबा विवाद के चलते महाराष्ट्र की महिला आयोग अध्यक्ष को देना पड़ा इस्तीफा

मुंबई/एजेंसी। महाराष्ट्र की राजनीति में शुक्रवार, 20 मार्च को हुए एक बड़े घटनाक्रम में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। रूपाली चाकणकर पिछले कुछ दिनों से एक विवादास्पद ‘स्वयंभू बाबा’ अशोक खरात के साथ अपने कथित संबंधों और वायरल तस्वीरों के कारण विपक्ष के निशाने पर थीं। रूपाली चाकणकर ने अपना त्यागपत्र मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंप दिया है, जिसे देर शाम स्वीकार कर लिया गया। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए चाकणकर को संकेत दिए थे कि जांच पूरी होने तक पद पर बने रहना उचित नहीं होगा।
इस्तीफे के बाद मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में रूपाली चाकणकर ने कहा, ‘संगठन और सरकार की छवि को आंच न आए, इसलिए मैंने स्वेच्छा से पद छोड़ने का निर्णय लिया है। मुझ पर लगे आरोप निराधार हैं और मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।’
बता दें कि विवाद की जड़ में नासिक का कथित आध्यात्मिक गुरु अशोक खरात है, जिसे हाल ही में पुलिस ने यौन उत्पीड़न और धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान इंटरनेट मीडिया पर कुछ ऐसी तस्वीरें प्रसारित हुईं, जिनमें चाकणकर उक्त आरोपित के आश्रम में विशेष पूजा-अर्चना करती दिख रही थीं। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि महिला आयोग की अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने पीड़ित महिलाओं की मदद करने के बजाय आरोपित को राजनीतिक संरक्षण दिया। विधानसभा में विपक्ष के नेता ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा था कि जो संस्था महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनी है, उसकी प्रमुख ही अगर अपराधियों के साथ खड़ी दिखेगी, तो जनता का विश्वास टूट जाएगा। शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस ने इस मामले में एसआईटी जांच की मांग की थी।
रूपाली चाकणकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की नेता हैं। महिला आयोग जैसे संवैधानिक पद पर रहते हुए किसी विवाद में नाम आना न केवल व्यक्तिगत छवि बल्कि संस्थान की गरिमा को भी प्रभावित करता है। चाकणकर का कार्यकाल वैसे तो सक्रिय रहा है, लेकिन ‘बाबा कनेक्शन’ ने उनके राजनीतिक सफर पर फिलहाल एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि जांच में उन्हें क्लीन चिट मिलती है या मुश्किलें और बढ़ती हैं।
चाकणकर के इस्तीफे के बाद अब महिला आयोग के नए अध्यक्ष की तलाश शुरू हो गई है। शासन स्तर पर चर्चा है कि किसी गैर-विवादास्पद और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय महिला चेहरे को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खरात मामले की जांच में जो भी नाम सामने आएंगे, उन पर बिना किसी दबाव के कार्रवाई की जाएगी।



