वक्फ संशोधन विधेयक मुस्लिम समाज के लोगों के कल्याण और प्रगति के लिए जरूरी : भाजपा नेता श्याम सुन्दर चौहान

वक्फ संशोधन विधेयक 2025: नए बदलावों का क्यों हो रहा विरोध ?

आजमगढ़/उत्तर प्रदेश। वक्फ संशोधन बिल 2025 गुरुवार को लोकसभा में 11 घंटे तक चली बहस के बाद पारित हो गया। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और उसके सहयोगियों द्वारा जोरदार समर्थन प्राप्त इस विधेयक के पक्ष में 288 वोट पड़े, जबकि इसके खिलाफ 232 वोट पड़े। सदन में इसकी शुरुआत हंगामेदार रही, क्योंकि विपक्षी इंडिया ब्लॉक पार्टी के नेताओं और सदस्यों ने इसका जमकर विरोध किया। विपक्ष द्वारा किए गए संशोधनों को खारिज किए जाने और बिल के स्पष्ट रूप से पारित होने के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी संसद से चले गए। इस विवादास्पद विधेयक का मुसलमानों ने भी कड़ा विरोध किया, जहां कई लोगों ने प्रस्तावित संशोधनों पर गुस्सा और निराशा व्यक्त की, वहीं अन्य ने मुसलमानों के भविष्य को लेकर चिंता जताई।
वहीं सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए आजमगढ़, उत्तर प्रदेश के भाजपा नेता श्याम सुन्दर चौहान ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की। उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक मुस्लिम समाज के लोगों के कल्याण और उनकी प्रगति के लिए लाया गया है, लेकिन मुस्लिम समाज को केवल वोट बैंक समझने वाले कुछ लोग इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं। ये वही लोग हैं जो जब सत्ता में होते हैं तब वक्फ संशोधन विधेयक पर ज्ञान देते हैं और जब सत्ता से बाहर होते हैं तो इसे मुसलमानों पर हमला बताने लगते हैं। यह दोहरे चरित्र की राजनीति अब ज्यादा दिनों तक नहीं चलने वाली।विपक्ष केवल तुष्टिकरण की राजनीति करने में विश्वास रखता है जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के सिद्धांत पर काम कर रही है। श्याम सुन्दर चौहान ने कहा कि भाजपा सरकार मुस्लिम समाज समेत सभी समुदायों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। वक्फ संशोधन विधेयक इसी दिशा में उठाया गया एक सकारात्मक कदम है। श्याम सुन्दर चौहान ने कहा कि उनका स्पष्ट मत है कि समाज के सभी वर्गों को समान अवसर मिलें और कोई भी पार्टी या नेता अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए किसी समुदाय का शोषण न करे। वे सभी से आग्रह करते हैं कि वे सभी ऐसे राजनीतिक षड्यंत्रों से बचें और विकास की राजनीति में भागीदार बनें।

Waqf Amendment Bill

वक्फ संपत्ति से जुड़े मुद्दे
वक्फ बिल के तहत नए कानून के लागू होने के बाद अगर वक्फ बोर्ड द्वारा दावा की गई संपत्ति आधिकारिक रूप से रजिस्टर नहीं है, तो वह छह महीने के बाद बोर्ड कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटा सकता। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 500 से 600 साल पुराने कई वक्फ ऐसे हैं, जिनके पास उचित दस्तावेज नहीं हैं। इसलिए वक्फ को डर है कि उसकी अनरजिस्ट्रड मस्जिदें, स्कूल और यहां तक ​​कि कब्रिस्तान कानूनी विवादों में फंस जाएंगे।
लिमिटेशन एक्ट 1963
संशोधन विधेयक धारा 107 को हटाने की अनुमति देता है और वक्फ बोर्ड को लिमिटेशन एक्ट 1963 के दायरे में लाता है। यह अधिनियम अब वक्फ संपत्ति के दावों पर लागू होगा और लंबी मुकदमेबाजी को कम करेगा।
मनमाने संपत्ति के दावों का अंत
इसके अलावा संशोधन के तहत वक्फ बिल की धारा 40 को हटाने के साथ, वक्फ बोर्डों को संपत्तियों को वक्फ के रूप में घोषित करने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। साथ ही समावेशिता के लिए अब दो गैर-मुस्लिमों को केंद्रीय और राज्य वक्फ बोर्डों में शामिल किया जाएगा। केवल प्रैक्टिसिंग मुस्लिम (पांच साल तक) ही अपनी संपत्ति वक्फ को समर्पित कर सकते हैं।
नए कानून के तहत मुस्लिमों द्वारा किसी भी कानून के तहत बनाए गए ट्रस्टों को अब वक्फ नहीं माना जाएगा।सरकार का ट्रस्टों पर पूरा नियंत्रण होगा। एक लाख रुपये से अधिक आय वाले वक्फ संस्थानों को अनिवार्य रूप से राज्य द्वारा नियुक्त ऑडिटरों द्वारा ऑडिट करवाना होगा। इसके अतिरिक्त बोर्ड में वक्फ संस्थानों का अनिवार्य योगदान 7 प्रतिशत से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है।

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