कानपुर जेल से 22 फीट ऊंची दीवार फांदकर हत्यारोपी फरार, तीन दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली

कानपुर/उत्तर प्रदेश। कानपुर जिला जेल से हत्या के आरोपी असरुद्दीन के फरार होने की घटना ने जेल प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। 22 फीट ऊंची दीवार फांदकर भागे इस शातिर अपराधी का तीन दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिल सका है।
कोतवाली पुलिस और जेल प्रशासन की टीमें उसकी तलाश में दिन-रात जुटी हैं, लेकिन वह पुलिस को चकमा देकर हवा में गायब हो गया है। डीआईजी जेल प्रदीप गुप्ता ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल का गहन निरीक्षण किया और कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए।
जाजमऊ थाना क्षेत्र के तिवारीपुर निवासी असरुद्दीन (25वर्ष) को 14 जनवरी 2024 को हत्या के मामले में कानपुर जिला जेल में बंद किया गया था। शुक्रवार, 8 अगस्त 2025 की रात साढ़े दस बजे कैदियों की नियमित गिनती के दौरान एक कैदी की कमी पाई गई। इस खबर से जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया।
जेलर ने स्वयं कैदियों की दोबारा गिनती कराई, लेकिन असरुद्दीन का कोई अता-पता नहीं चला। सीसीटीवी फुटेज की जांच में पता चला कि असरुद्दीन ने जेल की 22 फीट ऊंची दीवार फांदकर फरार होने की योजना को अंजाम दिया। फुटेज में वह मुलाहिजा बैरक के पास राशन गोदाम में छिपते और फिर टिन शेड पर चढ़कर दीवार फांदते हुए दिखाई दिया।
डीजी जेल प्रेमचंद्र मीणा ने इस सुरक्षा चूक पर त्वरित कार्रवाई करते हुए जेलर मनीष कुमार, डिप्टी जेलर रंजीत यादव, हेड वार्डन नवीन मिश्रा और वार्डन दिलशाद खान को निलंबित कर दिया। डीआईजी जेल प्रदीप गुप्ता को जांच का जिम्मा सौंपा गया। गुप्ता ने 10 अगस्त 2025 को जेल का चार घंटे तक निरीक्षण किया।
इस दौरान उन्होंने जेल के अंदर और बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की दृश्यता, उनकी क्षमता और एंगल की जांच की। उन्होंने असरुद्दीन के साथ बैरक में बंद अन्य कैदियों और निलंबित जेल कर्मियों के बयान दर्ज किए। जेल के पीसीओ से असरुद्दीन द्वारा की गई फोन कॉल्स की सूची भी तैयार कराई गई ताकि उसके संपर्कों का पता लगाया जा सके।
जांच में सामने आया कि असरुद्दीन ने फरार होने से पहले कई दिनों तक जेल परिसर की रेकी की थी। वह मुलाहिजा बैरक, मुलाकात स्थल और राशन गोदाम के आसपास संदिग्ध रूप से टहलता देखा गया था। सीसीटीवी फुटेज में वह गोदाम में बोरियों के पीछे छिपते, टिन शेड पर चढ़ते और फिर जेलर ऑफिस की छत के रास्ते बाहरी दीवार तक पहुंचते दिखा। इसके बाद वह गंगा नदी के किनारे की ओर भाग निकला। जेल की त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था को धता बताने वाली इस घटना ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोतवाली पुलिस ने असरुद्दीन को पकड़ने के लिए बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और जाजमऊ के ताड़बगिया इलाके में तलाशी अभियान चलाया। एक पुलिस टीम को उसके पैतृक गांव असम भी भेजा गया है। क्राइम ब्रांच और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) की टीमें भी उसकी तलाश में जुटी हैं। जेल अधीक्षक डॉ. बी.डी. पांडेय ने बताया कि जेल के अंदर और बाहर व्यापक तलाशी की गई, लेकिन असरुद्दीन का कोई सुराग नहीं मिला।
डीआईजी जेल प्रदीप गुप्ता ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने जेल की दीवारों की ऊंचाई बढ़ाने, सीसीटीवी कैमरों की संख्या और गुणवत्ता में सुधार करने, और निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए कहा। साथ ही, जेल कर्मियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए। गुप्ता ने एक सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपने का आश्वासन दिया है।

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