अरुणाचल प्रदेश में ट्रेकर्स को मिली गुप्त गुफा, द्वितीय विश्वयुद्ध में ट्रांजिट कैंप की तरह यूज करते थे सैनिक

ईटानगर/अरुणाचल प्रदेश। एक एवरेस्टर के नेतृत्व में ट्रेकर्स का ग्रुप अरुणाचल-म्यांमार सीमा के पास पहुंचा था। ट्रेकिंग के दौरान उनकी नजर एक पत्थर की गुफा पर गई। उस पर कुछ लिखा था। ट्रैकर्स ने अधिकारियों को सूचना दी। यह गुफा निकली, जिसका उपयोग द्वितीय विश्व युद्ध में जापानी सेना की प्रगति को रोकने के लिए मित्र देशों के बलों के ट्रांसिट कैंप के रूप में किया गया था। स्थानीय लोगों ने कहा कि गोलाकार प्रतीकों वाले पत्थर, अंग्रेजी में संक्षिप्त नाम और गुफा के साथ सैनिकों के किए गए नक्काशी की कुछ संख्याएं ट्रांसिट शिविर के प्रमुख संकेत थे।
तागित सोरंग की 27 सदस्यीय टीम सीमावर्ती राज्य के तिरप जिले की पहाड़ियों पर चढ़ाई कर रही थी। वे शुक्रवार को 2,119 मीटर (6,952 फीट) लोंगपोंगका बिंदु पर गुफा के पार पहुंचे। ट्रेकर्स ने जब इस गुफा को देखा तो अगले दिन फोटोग्राफिक सबूत और अन्य विवरण एकत्र किए।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मित्र देशों की सेनाओं ने बर्मा (अब म्यांमार) से उत्तर-पूर्व सीमा एजेंसी (अब अरुणाचल प्रदेश) के विशाल हिस्सों में जा रहे जापानी सैनिकों का विरोध करने के लिए रणनीतिक बिंदु का इस्तेमाल किया। इस बिंदु को युद्ध के बाद छोड़ दिया गया और बाहर दुनिया में इसके बारे में किसी को पता नहीं चल पाया।




