मोरबी ब्रिज की 49 में से 22 केबल पहले से टूटी हुई थी, एसआईटी की रिपोर्ट चौंकाने वाला खुलासा

अहमदाबाद,(एजेंसी)।  एक कहावत है कि हादसों का वर्क्त मुकर्रर नहीं होता है, लेकिन गुजरात के मोरबी में पिछले साल गिरे ब्रिज  का धराशायी होना तय था। इस हादसे की जांच के बने विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्राथमिक रिपोर्ट में कहा है कि ब्रिज की 49 में 22 केबल पहले से टूटी हुई थी। एसआईटी रिपोर्ट के फैक्ट की मानें तो यह दुर्घटना को दावत दी गई थी। पुल की देखरेख की जिम्मेदारी संभाल रहे ओरेवा ग्रुप ने घोर लारवाही बरती। जिसके चलते यह बड़ा हादसा हुआ और इसमें 135 लोगों की जान चली गई।

शहरी विकास विभाग की तरफ मोरबी नगर पालिका को भेजी गई रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। एसाईटी की प्रारंभिक जांच की रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया है कि केबल पर लगभग आधे तारों पर जंग लगी हुई थी। इन्हें किसी तरीके से बस जोड़ दिया गया था। एसआईटी ने इस रिपोर्ट को दिसंबर, 2022 में ही सौंप दिया था।हालांकि रिपोर्ट में फैक्ट अभी सामने आए हैं। 30 अक्तूबर को मोरबी की मच्छू नदी पर स्थित ऐतिहासिक ब्रिज टूट गया था। हादसे के बाद सरकार ने विशेष जांच दल का गठन किया था। एसआईटी की इस टीम में आईएएस अधिकारी राजकुमार बेनीवाल, आईपीएस अधिकारी सुभाष त्रिवेदी, राज्य सड़क और भवन विभाग के एक सचिव और एक चीफ इंजीनियर और स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग के एक प्रोफेसर को शामिल किया गया था।
एसआईटी की जांच में सामने आया है कि पुल को थामने वाली सामने की मेन केबल टूटने से बिज गिरा। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में पाया है कि रेनोवेशन के दौरान पुराने सस्पेंडर्स को नई रॉड के साथ वेल्ड कर दिया गया था। इतना ही नहीं एसआईटी की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि मोरबी नगर पालिका ने बिना जनरल बोर्ड की मंजूरी के ही कॉन्ट्रैक्ट दे दिया था। इसकी कोई चर्चा नहीं की गई थी। ओरेवा ग्रुप ने इसके बाद मरम्मत के लिए ब्रिज को बंद रखा और 26 अक्टूबर को बिना मंजूरी के खोल दिया था।

मोरबी हादसे के बाद पुलिस ने ग्रुप से जुड़े 9 कर्मचारियों को पकड़ा था। उसके साथ ग्रुप के एमडी और प्रमोटर जयसुख पटेल सरेंडर के बाद जेल में बंद हैं। पुलिस इस मामले में 1262 पेज की चार्जशीट पहले ही कोर्ट में पेश कर चुकी है। तो वहीं इस मामले हाईकोर्ट में भी केस चल रहा है।

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