रांची में नौकरी जाने से टूटा परिवार, बेटे की मौत, मां-बेटी गंभीर, चार दिन घर में कैद

रांची/एजेंसी। अरगोड़ा थाना क्षेत्र के कडरू न्यू एजी कॉलोनी स्थित मंदिर मार्ग पर सोमवार को एक ही परिवार के तीन सदस्यों ने आत्महत्या का प्रयास किया। इस घटना में बेटे मिहिर शेखर की मौत हो गई, जबकि मां स्नेहा अखोरी और बहन सौम्या की हालत गंभीर बनी हुई है। दोनों को पहले गुरुनानक अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन बाद में उन्हें शैमफोर्ड अस्पताल रेफर कर दिया गया। मिहिर शेखर ने अपने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी। वहीं, उसकी मां स्नेहा अखोरी और छोटी बहन सौम्या ने कीटनाशक का सेवन कर लिया। समय रहते सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मां-बेटी को अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, मिहिर को बचाया नहीं जा सका। अरगोड़ा थाना प्रभारी ने बताया कि स्नेहा अखोरी पेशे से अधिवक्ता हैं और हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करती थीं, लेकिन बीते कुछ महीनों से वह नियमित रूप से कोर्ट नहीं जा रही थीं। स्नेहा अपने दोनों बच्चों के साथ उसी मकान में रहती थीं। इसी घर में उनके साथ रहने वाली भाभी अखोरी सुधा सिन्हा ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस को दिए बयान में सुधा सिन्हा ने बताया कि सोमवार दोपहर वह अपनी बेटी को स्कूल से लेकर घर लौटी थीं। इसी दौरान ग्राउंड फ्लोर पर स्थित स्नेहा के कमरे से तेज आवाज सुनाई दी। जब उन्होंने दरवाजा खटखटाया तो काफी देर बाद बदहवास हालत में सौम्या बाहर निकली। उसने रोते हुए बताया कि उसके भाई मिहिर ने आत्महत्या कर ली है और उसने व मां ने भी जहर खा लिया है। यह सुनते ही सुधा ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
पुलिस जांच में सामने आया कि मिहिर शेखर ने सीए की पढ़ाई पूरी की थी। करीब एक माह पहले उसे कोलकाता में नौकरी मिली थी। परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं। लेकिन 13 जनवरी को मिहिर की मौसी किरण अखोरी का निधन हो गया। मौत की खबर मिलते ही मिहिर कोलकाता से रांची लौट आया। रांची आने के बाद उसकी नौकरी छूट गई, जिससे वह गहरे तनाव में आ गया। नौकरी जाने की बात को लेकर मिहिर काफी परेशान रहने लगा था। उसने अपनी मां से यह भी कहा था कि अब वह जिंदा नहीं रहना चाहता।
शुक्रवार को स्नेहा ने अपनी भाभी सुधा को फोन कर बताया था कि वह बच्चों के साथ कोलकाता जा रही हैं। सुधा को लगा कि परिवार मिहिर को वापस छोड़ने जा रहा है। इसके बाद शुक्रवार से लेकर सोमवार दोपहर तक स्नेहा के घर में कोई लाइट नहीं जली, जिससे किसी को शक नहीं हुआ। सोमवार को जब घर के भीतर से आवाज आई, तब जाकर लोगों को अनहोनी का अंदेशा हुआ।
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि परिवार कोलकाता नहीं गया था, बल्कि घर के अंदर ही बंद था। सौम्या ने सुधा को बताया कि मां ने उसे किसी को कुछ भी बताने से मना किया था। यह बात बताते-बताते सौम्या बेहोश हो गई। बताया गया कि सौम्या डीएवी श्यामली की कक्षा आठ की छात्रा है। पड़ोसियों का कहना है कि परिवार शांत स्वभाव का था और किसी से ज्यादा मेल-जोल नहीं रखता था।
सुधा सिन्हा ने बताया कि मिहिर के पिता कुमार संजय का कई वर्ष पहले निधन हो चुका था। वह बैंक में कार्यरत थे। पति की मौत के बाद स्नेहा ने अकेले ही दोनों बच्चों की परवरिश की थी। स्नेहा की शादी के बाद कुछ समय वह पटना स्थित ससुराल में रहीं, लेकिन बाद में रांची आकर रहने लगी थीं।
पुलिस ने बताया कि घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है। स्नेहा और सौम्या के होश में आने के बाद उनके बयान दर्ज किए जाएंगे, जिससे घटना के पीछे के कारणों को स्पष्ट रूप से समझा जा सके।घटना की चश्मदीद अखोरी सुधा सिन्हा ने बताया कि स्नेहा के कमरे से अचानक आवाज आने पर उन्हें लगा कि शायद घर में चोर घुस आए हैं। सुधा ने अपने बेटे को घर के पीछे भेजा ताकि घर के अंदर कौन है पता चल सके। लेकिन काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बाद सौम्या ने अचानक दरवाजा खोला, जिससे वह घबरा गईं। सौम्या की हालत बदहवास जैसी थी। उसे संभालते हुए जब सुधा घर के अंदर गईं तो वहां का दृश्य बेहद भयावह था। मिहिर का शव जमीन पर पड़ा हुआ था, जबकि स्नेहा भी फर्श पर गिरी हुई तड़प रही थी। सुधा ने कहा कि उसके द्वारा सही समय पर दरवाजा खुलवाया जिससे स्नेहा और सौम्या की जान बच सकी।
सुधा ने बताया कि स्नेहा ने पहले उन्हें कहा था कि मिहिर वर्क फ्रॉम होम कर रहा है। यदि उन्हें यह जानकारी होती कि मिहिर की नौकरी छूटने के कारण पूरा परिवार मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो शायद समय रहते उनकी मदद की जा सकती थी। पुलिस को सूचना देने के बाद सुधा ने मोहल्ले में भी घटना की जानकारी दी। इसके बाद मोहल्ले के सैकड़ों लोग स्नेहा के घर के बाहर इकट्ठा हो गए और घटना के बारे में जानने की कोशिश करने लगे। पूरा इलाका इस दर्दनाक घटना से स्तब्ध रह गया।

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