एमएलसी चुनाव की कवरेज कर रहे पत्रकारों को रोकने पर बवाल, एसडीएम से तीखी बहस का वीडियो वायरल
कौशाम्बी के सरसवाँ में एमएलसी चुनाव की कवरेज कर रहे पत्रकारों को रोकने पर विवाद हो गया। एसडीएम से बहस का वीडियो वायरल होने के बाद सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने निष्पक्ष जांच की मांग की।

सचिन पांडेय/जिला ब्यूरो चीफ
कौशाम्बी,उत्तर प्रदेश। मंझनपुर तहसील क्षेत्र के सरसवाँ में एमएलसी चुनाव की कवरेज कर रहे पत्रकारों को रोके जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मौके पर पत्रकारों और मंझनपुर के उपजिलाधिकारी राजकुमार मौर्य के बीच हुई तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। घटना को लेकर स्थानीय मीडियाकर्मियों और जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बताई जा रही है। कौशाम्बी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने भी मामले पर आपत्ति जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मिली जानकारी के अनुसार, सरसवाँ में एमएलसी चुनाव के दौरान पत्रकार मतदान प्रक्रिया की कवरेज कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें कथित तौर पर कवरेज करने से रोका गया, जिसके बाद पत्रकारों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच कहासुनी हो गई। इस घटनाक्रम में एसडीएम राजकुमार मौर्य और पत्रकारों के बीच हुई तीखी बहस का वीडियो किसी व्यक्ति ने बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पत्रकारों को रोके जाने की परिस्थितियों और प्रशासन के रवैये को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
पत्रकारों का कहना है कि चुनाव जैसी महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया के दौरान निष्पक्ष और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग के लिए मीडिया की भूमिका अहम होती है। ऐसे में कवरेज के दौरान किसी भी तरह की बाधा को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। हालांकि, पत्रकारों को किन परिस्थितियों में रोका गया और मौके पर क्या निर्देश दिए गए थे, इसकी आधिकारिक स्थिति सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।
इस मामले पर कौशाम्बी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने कड़ा रोष जताया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पत्रकारों की स्वतंत्रता और निष्पक्ष कवरेज का सम्मान किया जाना चाहिए। सच्चाई सामने लाने और जनहित से जुड़े सवाल पूछने वाली आवाजों को दबाना या अनुचित रूप से रोकना स्वीकार्य नहीं है। सांसद ने एसडीएम राजकुमार मौर्य और पत्रकारों के बीच हुई बहस सहित पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
सांसद पुष्पेंद्र सरोज के मुताबिक, जांच के जरिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि पत्रकारों को किस आधार पर रोका गया और विवाद किन परिस्थितियों में हुआ। उन्होंने जोर दिया कि घटना की सच्चाई सार्वजनिक होनी चाहिए, ताकि भविष्य में मीडियाकर्मियों को अपनी जिम्मेदारी निभाने के दौरान ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
घटना के बाद सरसवाँ में एमएलसी चुनाव की कवरेज को लेकर उठा विवाद प्रशासन और पत्रकारों के बीच संवाद तथा चुनावी रिपोर्टिंग की सीमाओं पर बहस का विषय बन गया है। अब मामले में प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच संबंधी कदमों पर नजर रहेगी।




