मणिपुर हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी को कोर्ट में पेश होंने का दिया आदेश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जांच की “सुस्त” गति और मणिपुर में मौजूदा कानून व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने टिप्पणी की कि जांच में प्रगति की कमी के कारण काफी समय बीत जाने के बावजूद कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप, कानूनी प्रणाली की प्रभावकारिता में जनता का विश्वास कम हो गया है और संवैधानिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने बताया कि जांच उल्लेखनीय रूप से सुस्त रही है, गिरफ्तारी या ठोस नतीजों के मामले में बहुत कम या कोई प्रगति नहीं हुई है। इसके अलावा, उन्होंने काफी समय बीतने के बाद ही बयान दर्ज करने की संबंधित प्रवृत्ति पर प्रकाश डाला, जिससे एकत्र किए गए सबूतों की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा हो गया। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार 7 अगस्त) के लिए तय की और मणिपुर के डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर सवालों के जवाब देने को कहा।

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