रेप के बाद अस्पतालों के चक्कर काटती रही युवती, 5.5 घंटे तक साथ में घूमते रही महिला पुलिसकर्मी

After the rape, the girl kept visiting hospitals, a female police officer kept roaming with her for 5.5 hours

इंदौर/मध्य प्रदेश। दुष्कर्म की पीड़ा झेल रही महिला को न्याय की उम्मीद में अस्पताल पहुंचने पर भी राहत नहीं मिली। सरकारी अस्पतालों की लचर व्यवस्था के चलते उसे साढ़े पांच घंटे तक इधर-उधर भटकना पड़ा, तब जाकर उसका मेडिकल संभव हो पाया।
दरअसल, मंगलवार सुबह खुड़ैल थाने में दुष्कर्म की शिकायत दर्ज करवाने के बाद पीड़िता को महिला पुलिसकर्मी के साथ सुबह 9:30 बजे पीसी सेठी अस्पताल लाया गया। लेकिन यहां कोई ड्यूटी डॉक्टर मौजूद नहीं था। आन-कॉल महिला डॉक्टर भी अनुपस्थित थी। इसके बाद उसे एमटीएच अस्पताल भेजा गया, लेकिन वहां भी उसे लौटा दिया गया।
पीड़िता करीब 1 बजे दोबारा पीसी सेठी अस्पताल पहुंची, लेकिन वहां भी कोई डॉक्टर नहीं मिला। स्टाफ ने बताया कि डॉक्टर दोपहर 2:30 बजे आएंगे। आखिरकार तीन बजे महिला का मेडिकल किया गया। इस दौरान पीड़िता इतनी हताश हो गई कि उसने कह दिया कि शायद मामला दर्ज न कराना ही बेहतर होता।
सरकारी अस्पतालों की यह अव्यवस्था कोई नया नहीं है। फरवरी 2024 में भी एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को मेडिकल के लिए दो दिन तक भटकना पड़ा था। पीसी सेठी अस्पताल से यह कहकर एमटीएच अस्पताल भेज दिया गया था कि सोनोग्राफी के लिए डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। घंटों इंतजार के बाद भी समाधान नहीं निकला और अंततः मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
पीसी सेठी अस्पताल के प्रभारी डॉ. वीरेंद्र राजगीर ने बताया कि अस्पताल में केवल पांच महिला चिकित्सक हैं, जिनमें से दो अवकाश पर थीं, जिससे यह समस्या उत्पन्न हुई। हमने डॉक्टरों की कमी को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत कराया है। सीएमएचओ डॉ. बीएस सैत्या ने कहा कि पीसी सेठी अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण मेडिकल में देरी हुई। पीजी की तैयारी के चलते कई डॉक्टर सेवा से हट गए हैं।

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