14 साल का मानवेन्द्र बना ‘श्रवण कुमार’ 43 डिग्री टेंपरेचर में लगा रहा वृन्दावन की दंडवती परिक्रमा

मथुरा/उत्तर प्रदेश। वृंदावन में जो व्यक्ति एक बार आ जाता है वह राधे की भक्ति में लीन हो जाता है। राधे रानी की कृपा ऐसी होती है कि वह व्यक्ति बिना किसी चीज की परवाह किए राधे की भक्ति करता है। ऐसे ही कृपा राधे की एक 14 वर्ष किशोर पर हुई है। 14 वर्षीय किशोर मानवेंद्र वृंदावन की दंडवती प्रथम कर रहा है और राधे रानी की भक्ति में लीन है। 43 डिग्री टेंपरेचर की गर्मी में उसकी भक्ति नहीं डगमगा रही है। मानवेंद्र अपने पिता की आज्ञानुसार वृंदावन की परिक्रमा कर रहा है।
भगवान बांके बिहारी की नगरी वृंदावन में आपको हर दिन नए-नए चमत्कार देखने को मिल जाएंगे। यह चमत्कारों का कोई भी ठिकाना नहीं है। राधे की कृपा एक 14 वर्षीय पर हुई। मानवेंद्र वृंदावन की दंडवती परिक्रमा कर रहा है। 43 डिग्री टेंपरेचर की गर्मी में मानवेंद्र की भक्ति डगमगा नहीं रही है। राधा नाम जपकार परिक्रमा लगा रहा है।वृंदावन की दंडवत परिक्रमा कर रहे मानवेंद्र से जब बात की तो उन्होंने बताया कि वह 14 वर्ष के हैं। वृंदावन की दंडवती परिक्रमा 3 दिन में पूरी कर लेते हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता सब्जी का ठेला लगाते हैं। पिता के आदेश के अनुसार वह दंडवती परिक्रमा लगाने के लिए वृंदावन आए हुए हैं। उन्होंने कहा कि राधा रानी की शरण में रहकर गर्मी का कोई एहसास नहीं होता। जिस पर राधा रानी की कृपा हो जाती है वह भवसागर से पर हो जाता है।
मानवेंद्र ने बताया कि वह अपने माता-पिता की सेवा करना चाहते हैं। उनके पिता ने ही उन्हें दंडवती परिक्रमा देने के लिए प्रेरित किया। मानवेंद्र की इस कहानी से उसे श्रवण कुमार की याद आती है, जो अपने माता-पिता को कंधों पर बिठाकर तीर्थ करने के लिए निकला हुआ था। आज के समय कलयुग में भी वृंदावन में इस तरह के चमत्कार आपको देखने को मिल जाएंगे।
14 वर्षीय किशोर मानवेंद्र के अंदर राधा रानी की ऐसी भक्ति जागृत हुई के वह अपने आप की सुध-बुध भी खो बैठा है। 3 दिन में दंडावती परिक्रमा वृंदावन की पूरी कर लेता है। परिक्रमा देने के दौरान मानवेंद्र किसी भी व्यक्ति का अन्य जल ग्रहण नहीं करता। जो व्यक्ति इसे खाने या पीने की वस्तु देने की उम्मीद करता है उसे हाथ जोड़कर मना कर देता है। राधा की भक्ति के लिए अपनी पढ़ाई भी छोड़ दी है।

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