दोबारा नौकरी लगाने के लिए मांगे 10 लाख रुपए! कुलपति, प्रोफेसर समेत 11 के खिलाफ केस दर्ज

Demanded 10 lakh rupees to get the job back! Case filed against 11 people including Vice Chancellor and Professor

आगरा/उत्तर प्रदेश। डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर आशु रानी समेत 11 लोगों के खिलाफ कोर्ट में वाद दायर हुआ है। सभी के खिलाफ पूर्व कर्मचारी ने याचिका डाली थी। आरोप लगाया था कि दोबारा नौकरी लगाने के लिए उससे 10 लाख रुपए की रिश्वत मांगी जा रही है। विश्वविद्यालय के द्वारा बनाई गई कमेटी ने उसकी सेवा बहाली पर विचार करने के लिए कहा है। फिर भी रिश्वत के चक्कर में उसे नौकरी पर नहीं रखा जा रहा था। मामले में सीजेएम ने आरोपियों के खिलाफ परिवाद दाखिल कर लिया है। इस मामले में सभी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में तैनात रहे कर्मचारी वीरेश कुमार ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां कुलपति प्रोफेसर आशु रानी, पूर्व कुलपति प्रोफेसर अशोक मित्तल, पूर्व कुलसचिव राजीव कुमार, प्रोफेसर अनिल वर्मा, प्रोफेसर यूसी शर्मा, प्रोफेसर संजय चौधरी, सहायक कुलसचिव पवन कुमार, प्रोफेसर बीडी शुक्ला, अधीक्षक अमृतलाल, मोहम्मद रईस, बृजेश श्रीवास्तव के खिलाफ प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। जिसमें धारा 409, 406, 420, 467, 468, 471, 384, 120 बी के तहत सभी आरोपियों के खिलाफ परिवाद दाखिल हो गया।
वीरेश ने अपने प्रार्थना पत्र में कहा कि वह इतिहास विभाग में 23 वर्षों से कार्यरत था। विभाग में अंकतालिका में गलतियां संशोधित किए जाने का कार्य होता था। इस कार्य को प्रोफेसर बीड़ी शुक्ला और प्रोफेसर अनिल वर्मा करते थे। इनके द्वारा कर्मचारी रईस के साथ मिलकर भ्रष्टाचार करते हुए अंकतालिकाओं में फेरबदल किया जाता था। जब शासन और प्रशासन स्तर पर जांच कार्रवाई की जा रही थी। तो उनके द्वारा सबूत को नष्ट करने के लिए सभी प्रपत्र 12 दिसंबर 2020 को जला दिए गए।
12 दिसंबर 2020 को मुझे प्रोफेसर अनिल वर्मा ने बुलाया और कहा कि बाहर रद्दी जल रही है। जरा देख कर आओ की जली या नहीं। मैं मौके पर गया तो भारी मात्रा में अंकतालिका जल रही थीं। मुझे नहीं पता था कि मुझे जानबूझकर वहां भेजा गया है। थोड़ी देर में वहां कुलपति प्रो. अशोक मित्तल आ गए और कुलपति ने बिना जांच किए मेरी सेवाएं समाप्त कर दीं। यही नहीं प्रोफेसर अनिल वर्मा ने मुझसे कहा कि अगर तुम मुझे 10 लाख दोगे तो मैं तुम्हारी नौकरी दोबारा लगवा दूंगा।
पूर्व कर्मचारी वीरेश ने याचिका में कहा है कि उसने साल 2021 में प्रोफेसर अनिल वर्मा के खिलाफ स्पेशल सीजेएम की कोर्ट में परिवाद दाखिल कराया था। जिसमें धारा 409, 406, 420, 467, 468, 471, 384, 120 बी के तहत परिवाद दाखिल हो गया। मगर विश्वविद्यालय में हुई कार्य परिषद की बैठक में निर्णय लिया गया कि अगर वीरेश कुमार के द्वारा न्यायालय से केस वापस ले लिया जाता है तो विश्वविद्यालय में पुनः बहाली पर विचार किया जाएगा। इस पर वीरेश ने अपना वाद वापस ले लिया। वीरेश कुमार ने प्रार्थना पत्र में कहा है कि उसे बहाल किए जाने के लिए विश्वविद्यालय के द्वारा बनाई गई कमेटी ने भी आदेश पारित किए थे। केस वापस लेने के बाद भी उसे नौकरी पर नहीं रखा गया।
डॉ.भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कई कुलपति भ्रष्टाचार के मामले में फंस चुके हैं। जिनकी जांच में चल रही हैं। कुलपति प्रोफेसर डीएन जौहर और कुलपति प्रोफेसर मोहम्मद मुजम्मिल के खिलाफ विजिलेंस ने हरीपर्वत थाने में भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें कई प्रोफेसर भी शामिल हैं। पूर्व कुलपति डॉ. अरविंद दीक्षित की भ्रष्टाचार के मामले में विजिलेंस जांच चल रही है। गोपनीय जांच में यह दोषी भी पाए जा चुके हैं। डॉ. अरविंद दीक्षित के बाद आए पूर्व कुलपति प्रोफ़ेसर अशोक मित्तल को भ्रष्टाचार के चलते राज भवन के द्वारा हटाया गया था। अब वर्तमान कुलपति प्रोफेसर आशु रानी भी भ्रष्टाचार के मामले में फंस चुकी हैं। लोकायुक्त के यहां भी उनके खिलाफ शिकायत पर सुनवाई चल रही है।

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