गाजियाबाद के वसुंधरा पुलिस चौकी में ब्लास्ट, ‘तहरीक-उल-मुजाहिदीन हिंदुस्तान’ संगठन ने ली जिम्मेदारी

गाजियाबाद की वसुंधरा पुलिस चौकी में हुए ब्लास्ट में नया खुलासा हुआ है कि विस्फोटक एलिवेटेड रोड से फेंका गया था। तहरीक-उल-मुजाहिदीन हिंदुस्तान ने इसकी जिम्मेदारी ली है। जांच एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं।

गाजियाबाद,उत्तर प्रदेश। जिले की इंदिरापुरम थाना क्षेत्र की वसुंधरा पुलिस चौकी में शुक्रवार रात हुए विस्फोट की जांच में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, एलिवेटेड रोड से विस्फोटक फेंका गया था। रात करीब 10 बजे हुए धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि चौकी के दो कमरों की खिड़कियां टूट गईं और दीवारों में दरारें आ गईं। घटना के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं।

शनिवार सुबह पुलिस कमिश्नर जे. रविन्द्र गौड़ ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। उनके साथ आईबी समेत अन्य जांच एजेंसियों की टीमें भी मौके पर पहुंचीं और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। पुलिस कमिश्नर ने जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई किए जाने की बात कही है। फिलहाल विस्फोट की प्रकृति, इस्तेमाल किए गए पदार्थ और घटना के पीछे शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

इस बीच ‘तहरीक-उल-मुजाहिदीन हिंदुस्तान’ नाम के एक संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट जारी कर विस्फोट की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। पोस्ट में संगठन ने पुलिस को निशाना बनाने की बात कही है और सरकार तथा सुरक्षा व्यवस्था के खिलाफ आपत्तिजनक एवं भड़काऊ टिप्पणियां की हैं। पोस्ट में असम के डिटेंशन सेंटर, बुलडोजर कार्रवाई और धार्मिक स्थलों से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए अपने कथित हमले को सही ठहराने की कोशिश की गई है। संगठन ने आगे भी कार्रवाई करने की धमकी दी है।

पोस्ट में हिंदू समुदाय को संबोधित करते हुए भी धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही मुस्लिम समुदाय से कथित सैन्य कार्रवाई को लेकर चिंता न करने की अपील की गई है। संगठन ने अपनी पोस्ट में धार्मिक भावनाओं से जुड़े कई विवादित दावे भी किए हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर किए गए इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियां इसकी सत्यता तथा घटना से इसके संभावित संबंध की पड़ताल कर रही हैं।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, जिस एक्स अकाउंट से यह पोस्ट साझा की गई है, उसके केवल दो फॉलोअर हैं और इसे अगस्त 2025 में बनाया गया था। ऐसे में जांच एजेंसियां अकाउंट की प्रामाणिकता, इसे संचालित करने वालों की पहचान और पोस्ट के पीछे की मंशा का पता लगाने में जुटी हैं।

पुलिस चौकी जैसी संवेदनशील जगह पर विस्फोट की घटना को सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना जा रहा है। जांच एजेंसियां घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, संभावित विस्फोटक सामग्री और सोशल मीडिया पर सामने आए जिम्मेदारी के दावे को आपस में जोड़कर जांच कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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