पुतिन की यूरोप को चेतावनी, बोले- रूस युद्ध के लिए तैयार, लेकिन टकराव नहीं चाहता
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोप को बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर हालात बिगड़ते हैं, तो रूस यूरोपीय देशों के साथ युद्ध के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मॉस्को यूरोप के साथ युद्ध नहीं चाहता है और इसका कोई भी विजेता नहीं होगा।

मॉस्को,एजेंसी। रूस और यूरोपीय देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने कहा है कि उनका देश हर परिस्थिति में यूरोप के साथ युद्ध के लिए तैयार है, लेकिन वह ऐसा करना नहीं चाहता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तनाव बढ़कर युद्ध तक पहुंचा तो इसके परिणाम दोनों पक्षों के लिए बेहद गंभीर होंगे और इस संघर्ष में किसी की जीत नहीं होगी। साथ ही पुतिन ने यूरोपीय देशों के साथ संबंध सामान्य करने और राजनयिक बातचीत दोबारा शुरू करने की पहल का स्वागत करने की बात कही।
पुतिन ने नॉर्वे के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और फिनलैंड के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोन के साथ बातचीत के दौरान ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि रूस यूरोपीय देशों के साथ संबंध बहाल करने के किसी भी प्रयास का समर्थन करेगा और ऐसी पहल को आगे बढ़ाने में हरसंभव सहयोग देने को तैयार है। उनके मुताबिक, युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है और यदि दोनों पक्षों के बीच सैन्य टकराव हुआ तो उसका खामियाजा सभी को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस युद्ध में कोई विजेता नहीं होगा।
रूसी राष्ट्रपति ने बाल्टिक सागर में जहाजों की आवाजाही पर संभावित रोक को लेकर भी यूरोपीय देशों को आगाह किया। उन्होंने अमेरिका-ईरान युद्ध और उसके बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई स्थिति का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि क्या यूरोपीय देश उत्तरी यूरोप में भी इसी तरह का टकराव मोल लेना चाहते हैं। पुतिन ने कहा कि यदि रूस के हितों के खिलाफ कोई कदम उठाया गया या तनाव को एक सीमा से आगे बढ़ाया गया तो मॉस्को पूरी ताकत से जवाब देगा।
यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों की ओर से की जा रही सैन्य सहायता के कारण रूस तथा नाटो देशों के संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं। रूस लगातार पश्चिमी देशों की भूमिका पर आपत्ति जताता रहा है, जबकि यूरोपीय देश यूक्रेन की संप्रभुता और सुरक्षा के समर्थन में अपनी नीतियों को उचित ठहराते हैं। ऐसे माहौल में पुतिन का ताजा बयान यूरोप और रूस के बीच जारी तनाव को लेकर एक बार फिर चर्चा में है।
दूसरी ओर, फिनलैंड के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोन ने कहा कि उन्होंने और नॉर्वे के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने बातचीत के दौरान रूस और यूरोपीय देशों के बीच तनाव कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यूक्रेन के प्रति यूरोपीय समर्थन की प्रतिबद्धता भी दोहराई। हालांकि, पुतिन से सीधे बातचीत को लेकर यूरोप के कुछ देशों में आलोचना भी हुई है। आलोचकों ने इस संपर्क के औचित्य और कूटनीतिक प्रोटोकॉल को लेकर सवाल उठाए हैं।
पुतिन के बयान में एक ओर युद्ध की स्थिति में कड़े जवाब की चेतावनी है, तो दूसरी ओर यूरोप के साथ संवाद और संबंध सुधारने की इच्छा भी जताई गई है। ऐसे में रूस और यूरोपीय देशों के बीच आगे होने वाली कूटनीतिक पहल और यूक्रेन को लेकर दोनों पक्षों के रुख पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।




