दिल्ली में 7.36 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, दो बैंक प्रबंधकों समेत छह गिरफ्तार; 37 फर्जी खातों का इस्तेमाल
दिल्ली पुलिस ने 7.36 करोड़ रुपये के साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश कर बैंक मैनेजर समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में 37 म्यूल खाते 99 साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़े मिले।

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने 7.36 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए कैथोलिक सीरियन बैंक के दो शाखा प्रबंधकों समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि कथित गिरोह ने 37 म्यूल बैंक खातों के जरिए देशभर में दर्ज 99 साइबर अपराध शिकायतों से जुड़ी रकम का लेन-देन किया। आरोप है कि बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से खाताधारकों की वास्तविक मौजूदगी के बिना खाते खोले गए और ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से आगे स्थानांतरित किया गया।
मामले की जांच उत्तर-पश्चिम जिला साइबर पुलिस थाने ने की। पुलिस के अनुसार, जांच की शुरुआत कैथोलिक सीरियन बैंक की त्रिनगर शाखा में संदिग्ध खातों की पहचान से हुई। इनमें एक ऐसा खाता भी सामने आया, जिसके धारक राहुल के बैंक शाखा में आने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके बाद 17 जून 2026 को भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर विशेष जांच दल गठित किया गया।
पुलिस जांच में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मयंक कपूर उर्फ रिंकू की पहचान की गई। उसे बाबा हरिदास नगर से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान कथित तौर पर सामने आया कि वह दिहाड़ी मजदूरों को ऋण दिलाने का झांसा देकर उनके पहचान संबंधी दस्तावेज और तस्वीरें हासिल करता था। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कथित तौर पर बैंक खाते खुलवाने और म्यूल सिम कार्ड तैयार कराने में किया जाता था। ऐसे खातों के जरिए साइबर ठगी से प्राप्त रकम जमा कराई जाती थी।
पुलिस के मुताबिक, ठगी की रकम को आगे स्थानांतरित करने के लिए यूएसडीटी यानी टेथर क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया जाता था। मयंक कपूर कथित तौर पर ट्रस्ट वॉलेट के माध्यम से इस रकम को प्राप्त करने और आगे भेजने का काम करता था। जांच में सामने आए 37 संदिग्ध खातों में से लगभग 17 खाते सरस्वती विहार शाखा और करीब 20 खाते त्रिनगर शाखा में खोले जाने की बात कही गई है।
पुलिस का आरोप है कि इस नेटवर्क में बैंक प्रबंधकों की भी भूमिका थी। जांच के अनुसार, मयंक कपूर की मुलाकात कैथोलिक सीरियन बैंक की सरस्वती विहार शाखा के प्रबंधक शोभित अग्रवाल से हुई थी। बाद में शोभित अग्रवाल ने उसे त्रिनगर शाखा के प्रबंधक सुशांत कुमार से मिलवाया। पुलिस का दावा है कि इन अधिकारियों की मदद से वास्तविक खाताधारकों की मौजूदगी के बिना खाते खोले गए और दस्तावेजों में कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए। ठगी की रकम का एक हिस्सा बैंककर्मी को दिए जाने का आरोप भी है। मामले में दोनों बैंक प्रबंधकों समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 63 आधार कार्ड, 60 पैन कार्ड, 55 पासपोर्ट आकार के फोटो, 11 संदिग्ध सिम कार्ड, सात मोबाइल फोन, सात चेकबुक और सात डेबिट कार्ड बरामद किए। इसके अलावा 60 हजार रुपये नकद, करीब 150 ग्राम सोना और एक लैपटॉप भी जब्त किया गया है। पुलिस इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के जरिए नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा संदिग्ध लेन-देन का पता लगाने में जुटी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में देशभर में दर्ज साइबर अपराध शिकायतों और बैंक खातों के बीच संबंधों की जांच की जा रही है। जांच का उद्देश्य ठगी की रकम के पूरे प्रवाह, कथित सहयोगियों और अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान करना है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होगी।



